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अगर मन में ठान लें और ध्यान को केंद्रित कर दिया जाए तो हम अपनी कमजोरी को भी ताकत बनाकर सफलता पा सकते हैं. ऐसी ही सफलता का उदाहरण है दिव्यांग कैटेगरी की ऑल इंडिया में छठी रैंक और दिल्ली में टॉप करने वाली हिरण्या. हिरण्या ने इस साल CBSE दसवीं बोर्ड में ऑल इंडिया में दिव्यांग कैटेगरी में 95.8% के साथ छठी रैंक हासिल की है. वहीं दिव्यांग कैटेगरी की टॉपर रही है. वह सेरेब्रल पाल्सी पीडि़त है. इस बीमारी में शरीर की कुछ मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पाती. व्हीलचेयर के जरिए ही कहीं भी आना-जाना पड़ता है.दिल्ली के द्वारका में सेंट मैरी स्कूल की छात्रा हिरण्या ने सीबीएसई नतीजों में 497 अंक हासिल किए. उसने बताया कि आज बेटियों के लिए शिक्षित होना बेहद जरूरी है. हिरण्या का परिवार मूलत: बिहार का रहने वाला है. हिरण्या की मां अपाला भार्गवी ने बताया वह लोग बिहार के पटना जिले के आरा के रहने वाले हैं. 2008 से वह दिल्ली में रह रही हैं. हिरण्या को बेहतर शिक्षा देने के लिए ही दिल्ली आने का मन बनाया था और बेटी ने उनके सपने को पूरा कर दिखाया.
अपाला ने बताया कि जब वह हैदराबाद में थी तो उन्होंने अपनी बच्ची के लिए स्कूल में दाखिला देने के लिए कई स्कूलों के चक्कर लगाए लेकिन कहीं भी उनकी बच्ची को एडमिशन नहीं मिला. उसके बाद दिल्ली आई और दिल्ली में भी डिसेबल कैटेगरी का स्टूडेंट देखकर कई स्कूलों में एडमिशन देने से नकार दिया लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और फिर मैंने द्वारका सेंट मैरी में अपनी बच्ची का एडमिशन कराया.
हिरण्या ने बताया कि मेरे लिए मां से बढ़कर कुछ नहीं है वही उसकी मां ने बताया कि मेरे बनने के पीछे बेटी का ही हाथ है मेरी बेटी मेरी सृष्टि है. हिरण्या की मां सरदार पटेल विद्यालय लोधी स्टेट में टीचर है. हिरण्या को पढ़ाई के अलावा शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि है. वह हिंदुस्तानी संगीत के साथ-साथ कन्नड़ शास्त्रीय संगीत भी सुनती है. पंडित जसराज को सुनना उसे बेहद पसंद है.हिरण्या डीपीएस द्वारका में दाखिला लेकर 12वीं की पढ़ाई करेगी और भविष्य में UPSC पास कर देश की सेवा करना चाहती है या फिर एकेडमिक में जाकर शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहती है. हिरण्या ज्यादा ठीक से लिख नहीं पाती इसीलिए पेपर के दौरान उसे राइटर भी दिया गया और उसकी राइटर कृतिका ने उसकी बेहद मदद की.
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