READ MORE
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया मन की बात में ओडिशा स्थित कटक के एक चाय वाले का जिक्र किया था. प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘कल ही मुझे डी. प्रकाश राव से मिलने का सौभाग्य मिला. डी. प्रकाश राव पिछले पांच दशक से शहर में चाय बेच रहे हैं. एक मामूली सी चाय बेचने वाला, आज आप जानकर हैरान हो जायेंगे 70 से अधिक बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा भर रहा है. उन्होंने बस्ती और झुग्गियों में रहने वाले बच्चों के लिए ‘आशा आश्वासन’ नाम का एक स्कूल खोला.’पीएम ने कहा था, ‘ये गरीब चाय वाला अपनी आय का 50% उसी में खर्च कर देता है. वह स्कूल में आने वाले सभी बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन की पूरी व्यवस्था करते हैं. मैं डी. प्रकाश राव की कड़ी मेहनत, उनकी लगन और उन ग़रीब बच्चों के जीवन को नयी दिशा देने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं.’
डी प्रकाश राव ने कहा, ‘लोगों ने अब मेरे पैरों को छूना शुरू कर दिया है.’ राव 6 वर्ष की उम्र से ही चाय बेच रहे हैं. राव ने शुरुआती उम्र में चाय बेचना शुरू किया, लेकिन बाद में वह एक शिक्षक बन गए. वह अस्पताल में मरीजों के साथ जाते हैं और अपना स्कूल चलाते हैं. राव अब तक 271 बार रक्तदान कर चुके हैं.
आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई पूरी करने में असमर्थ रहे प्रकाश राव अब झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों के जरिए अपना सपना जीते हैं, जिनके पास स्कूल की फीस चुकाने के लिए पैसा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि इन बच्चों की पढ़ाई में इसीलिए कमी आए क्योंकि उनके पास पैसा नहीं है. इसलिए मैं अपना समय स्कूल, चाय की दुकान और अस्पताल में मरीजों से मिलने के लिए समय बांट लेता हूं.’फिलहाल, 70 से अधिक छात्र उनके स्कूल में पढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि इन छात्रों को घर पर बेकार रहना या सड़कों पर घूमने के बजाय स्कूल में उन्हें अधिक आराम मिलता है. उन्होंने कहा, ‘लगभग 70-75 छात्र मेरे स्कूल में पढ़ते हैं. उनके माता-पिता वास्तव में उनके पढ़ाई के बारे में परेशान नहीं हैं.’
उन्होंने कहा कि बच्चे पहले उन्हें नहीं आना चाहते थे, लेकिन जब उन्होंने उन्हें भोजन की पेशकश की, तो वे आने लगे. उन्होंने कहा, ‘सीजन के दौरान 600 रुपये प्रति दिन और सीजन चालू होने पर लगभग 700-800 रुपये कमाते हैं. इसलिए, पैसा मेरे लिए कोई मुद्दा नहीं है. मैं सिर्फ इन बच्चों को भविष्य में कुछ देखना चाहता हूं.’
No comments:
Post a Comment