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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने राजनीतिक दलों से जनता में अपना विश्वास बहाल करने के लिये देशहित में मिलकर काम करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि ‘बेहतर भारत’ को लेकर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और ‘नये भारत’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नजरिया एक समान है, जिसका मकसद देश के सभी नागरिकों के सपनों और अपेक्षाओं को पूरा करना है.नायडू ने कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की किताब ‘स्ट्रेट टॉक’ का विमोचन करते हुये वैचारिक विषमता को राजनीतिक शत्रुता में बदलने की प्रवृत्ति से बचने की अपील करते हुये यह बात कही.
इस दौरान नायडू ने संसद की कार्यवाही में बाधा डालने वाले सदस्यों को स्वत: निलंबित करने के सिंघवी के सुझाव को बेहतर बताया है. उन्होने राज्यसभा की कार्यवाही प्रक्रिया संबंधी नियमों की समीक्षा के लिये गठित समिति द्वारा इस सुझाव पर विचार करने की उम्मीद जताई है.
नायडू ने कहा कहा कि संसद की कार्यवाही को लगातार और लंबे समय तक बाधित करने की समस्या चिंता पैदा करती है. उन्होने कहा कि मुझे खुशी है कि सिंघवी के स्वत: निलंबन के सुझाव में मेरी चिंता की ध्वनि साफ सुनायी देती है.नायडू ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिये उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही के प्रक्रिया संबंधी नियमों की समीक्षा के लिये एक समिति गठित की है. जिससे सदन की कार्यवाही को सुचारु बनाने के उपाय खोजे जा सकें. उन्होंने बताया कि इस समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है और अगले महीने इसकी अंतरिम रिपोर्ट पेश किये जाने की उम्मीद है. इसके साथ ही उन्होंने यह उम्मीद जताई कि समिति सिंघवी के इस सुझाव पर भी विचार करेगी.
राजनीतिक विद्वेष के बारे में नायडू ने कहा कि सियासी दलों का एक दूसरे के लिये विरोधी होना ठीक है लेकिन आपसी शत्रुता को उचित नहीं ठहराया जा सकता है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस अंतर को समझने की अपेक्षा व्यक्त करते हुये कहा कि शत्रुता सिर्फ विनाश का कारण बनती है.
उपराष्ट्रपति ने विधायिका के सदस्यों के लिये योग्यता के पैमानों का उल्लेख करते हुये कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि के लिये सामर्थ्य, चरित्र और व्यवहार जरूरी गुण हैं. लेकिन इनकी जगह जाति, समुदाय, भ्रष्ट आचरण और आपराधिक बाहुबल स्वीकार्य नहीं हैं.
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