Tuesday, 29 May 2018

आज का जैश आतंकी मुनीर कादिरी कल तक चल रहा था शांति की राह पर


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एनआईए ने पिछले हफ्ते जिस सैयद मुनीर – उल – हसन कादिरी को जैश – ए – मोहम्मद का सदस्य घोषित किया था, उसने सात साल पहले आतंकवाद का रास्ता छोड़कर शांति और बेहतर जीवन का रास्ता चुना था. साथ ही अपने परिवार के साथ नेपाल के रास्ते पीओके से कश्मीर लौट आया था.अब्दुल्ला सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत कश्मीर आया था कादिरी
अधिकारियों ने बताया कि कादिरी को अब गिरफ्तार कर लिया गया है और आरोप है कि नगरोटा में एक सैन्य शिविर पर 2016 में हुए एक आतंकवादी हमले में वह शामिल था. कादिरी आतंकवाद का रास्ता छोड़ चुके उन 450 आतंकवादियों में शामिल था, जो राज्य की पूर्व उमर अब्दुल्ला सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत नेपाल के रास्ते कश्मीर वापस आए थे.


कादिरी 2011 में अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ वापस लौटा था1990 के दशक की शुरुआत में पीओके पहुंचा पीपुल्स लीग का एक सक्रिय सदस्य कादिरी 2011 में अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ वापस लौटा था. श्रीनगर के निचले इलाके में गिरफ्तार दो युवकों से पूछताछ के दौरान उसका नाम सामने आने के बाद इस महीने की शुरुआत में जम्मू कश्मीर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.


‘नगरोटा में हुए आतंकवादी हमले में शामिल कथित रूप से शामिल था कादिरी’
पूछताछ के दौरान कादिरी ने जम्मू के नगरोटा में 2016 में एक सैन्य शिविर पर आतंकवादी हमले में अपने शामिल होने के बारे में कथित रूप से बताया. इस हमले में दो अधिकारियों समेत सेना के सात जवान शहीद हो गये थे. इसके बाद 26 मई को उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में दे दिया गया.


कादिरी ने 2011 में रेडिमेड कपड़ों का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया था
अधिकारियों ने बताया कि 2011 में आतंकवाद का रास्ता छोड़कर लौटे कादिरी को अपना जीवन फिर से शुरू करने के लिए जम्मू कश्मीर बैंक से लोन भी दिया गया था, जिससे उसने रेडिमेड कपड़ों का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया था लेकिन 2014 की बाढ़ में यह सब बर्बाद हो गया.


‘आतंकवाद के रास्ते पर लौटने के अलावा कोई  दूसरा रास्ता नहीं था’
कादिरी ने अक्टूबर 2015 में दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था कि ‘मेरे पास अपना घर चलाने के लिए आतंकवाद के रास्ते पर लौटने के अलावा कोई  दूसरा रास्ता नहीं बचा था’


‘कादिरी ने 2016 से जैश – ए – मोहम्मद के साथ काम करना शुरू कर दिया’
एक अधिकारी के अनुसार कादिरी ने सितम्बर  2016 से जैश – ए – मोहम्मद के साथ काम करना शुरू कर दिया और उस साल नवम्बर में जम्मू क्षेत्र के नगरोटा में सैन्य शिविर में तीन आतंकवादियों को भेजने में मदद की.


‘बड़े – बड़े वादे कर के भीख मांगने के लिए छोड़ दिया गया’
कादिरी ने कहा था कि ‘हमसे बड़े – बड़े वादे किये गये थे लेकिन हमारे पास पहनने के लिए ढ़ंग के कपड़े भी नहीं थे. हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भीख मांगने के लिए छोड़ दिया गया.’


केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां लम्बे समय से कहती आ रही है कि नेपाल से लौटने वाले लोगों के लिए एक समाधान होना चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है , तो वे घाटी में आतंकवादी समूहों का फिर से शिकार हो जायेंगे.


‘महबूबा मुफ्ती सरकार ने इस मामले को केंद्र के सामने उठाया था’
एक अधिकारी ने बताया कि महबूबा मुफ्ती सरकार ने इस मामले को केंद्र के सामने उठाया था , लेकिन उस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया.


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