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अभिनेता से नेता बने दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत ने तूतीकोरिन (तुत्तुकुड़ी) में स्टरलाइट प्लांट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में घायल हुए लोगों से बुधवार को अस्पताल जाकर मुलाकात की. वहीं इसके बाद मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने स्टरलाइट प्लांट के मालिकों में ‘अमानवीय’ करार दिया और कहा कि यह प्लांट अब कभी नहीं खुलना चाहिए.वहीं तूतीकोरिन में हिंसा के लिए रजनीकांत ने असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि हिंसा में शामिल उनके के खिलाफ राज्य सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. हालांकि उन्होंने पुलिस फायरिंग की इजाजत देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा, ‘लोग किसी वजह से ही वहां प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस को इस दौरान संयम बरतना चाहिए.’
रजनीकांत इस मामले में राज्य सरकार का भी बचाव करते दिखे. उन्होंने कहा कि हर मामले पर सरकार से इस्तीफा मांगना कोई समाधान नहीं है. यह घटना सरकार के लिए एक बड़ा सबक है. किसी को भी इतनी हिंसा का अंदाजा नहीं था. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लोग सब जानते हैं और वे वक्त आने पर जवाब देंगे. मुझे यकीन है कि खुफिया विभाग को भी इसकी रिपोर्ट मिलेगी.
रजनीकांत ने इससे पहले न्यूज़18 से बातचीत में कहा, ‘पुलिस फायरिंग में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों को सजा मिलनी चाहिए. अभी के लिए तो सरकार की कार्रवाई संतोषजनक है, लेकिन राज्य सरकार को जरूरत पड़ने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए.’तमिल सुपरस्टार रजनीकांत ने तूतीकोरिन में पुलिस फायरिंग के अगले दिन भी एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी.
#SterliteProtest pic.twitter.com/XPKov0Ln2O
— Rajinikanth (@rajinikanth) May 23, 2018
बता दें कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन के खिलाफ पिछले तीन महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन 22 मई को अचानक उग्र हो गया. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन पर फायरिंग की दी थी. इस पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे.
इस मामले में हंगामा बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने स्टरलाइट प्लांट का लाइसेंस रद्द कर दिया. वहीं राज्य की विधानसभा में भी यह मामला जोर-शोर से उठा, जहां मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी ने कहा कि उन हालात में पुलिस कार्रवाई ‘जरूरी’ हो गई थी.
मुख्यमंत्री ने ने लोगों की मौत पर दुख जताते हुए सदन में पांच पन्नों की रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट में हिंसा की घटना और इसे लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण था. मुख्यमंत्री ने कहा कि कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ आंसू गैस के गोले तथा लाठी चार्ज जैसे कदम उठाए गए.
हालांकि मुख्यमंत्री के इस बयान से डीएमके संतुष्ठ नहीं दिखी और उसने सदन से वाकआउट कर दिया. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने प्लांट बंद करने के सरकारी आदेश को आंखों में धूल झोंकने वाला करार दिया. उन्होंने कहा कि 2013 में भी ऐसी ही नोटिस के बाद प्लांट दोबारा खोला गया था. उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से स्टरलाइट मैनेजमेंट को इस संबंध में अदालत की शरण में जाने का मौका मिल गया.
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तूतीकोरिन : इनके ऑर्डर पर हुई थी पुलिस फायरिंग, CID के हवाले हुआ केस
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