Thursday, 31 May 2018

2 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था ने ऐसे लगाई लंबी छलांग, चीन को छोड़ा पीछे


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पिछले दो सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था में रफ्तार आई है. भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है. दरअसल, सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीडीपी में 7.5 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान को बरकरार रखा है. ऐसे में देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का दर्जा कायम रहने से मोदी सरकार उत्साहित है.अच्छी ग्रोथ रेट पर वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए ये अच्छी खबर है. उन्होंने कहा कि बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 7.7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट थी. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भविष्य में ऊंची वृद्धि दर पाने के लिए अर्थव्यवस्था सही राह पर बढ़ रही है.


पीयूष गोयल ने ट्वीट किया , ‘‘हर तिमाही के साथ जीडीपी की वृद्धि दर लगातार बढ़ रही है. चौथी तिमाही में 7.7 प्रतिशत ग्रोथ रेट से पता चलता है कि यह भविष्य में और ऊंची वृद्धि दर हासिल करने की राह पर है. यह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सही विकास है.’’ बता दें कि जनवरी- मार्च की तिमाही में चीन की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही है, भारत की ग्रोथ रेट से यह बहुत कम है.


चौथी तिमाही के वृद्धि दर के आंकड़े आने के बाद आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार चालू वित्त के लिए अपने 7.5 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान में कटौती नहीं कर रही है. 2017-18 में अर्थव्यवस्था 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों और जीडीपी वृद्धिमें कोई सह संबंध नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटा तय लक्ष्य के दायरे में रहेगा.


एक्सपर्ट्स कहते हैं कि जीडीपी के ताजा आंकड़ों से साफ है कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था अब नोटबंदी और जीएसटी के झटके से उबर कर मजबूती की राह पर है. रिजर्व बैंक ने भी अप्रैल की मॉनिटरी पॉलिसी स्‍टेटमेट में कहा था कि देश में निवेश की गतिविधियों में तेजी आ रही है जिससे आने वाले समय में अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी आएगी.


बता दें कि बुधवार को अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विसेज ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के अपने अनुमान को घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया था. पहले एजेंसी ने 7.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया था. मूडीज ने कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था में क्रमिक सुधार हो रहा है लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें और मुश्किल वित्तीय हालात भारत की सुधार की रफ्तार को धीमा करेंगी. (एजेंसी इनपुट के साथ)


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