Wednesday, 30 May 2018

तूतीकोरिन हिंसा: मद्रास हाईकोर्ट का आदेश, मारे गए लोगों के दोबारा हों पोस्टमॉर्टम: ANI


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तूतीकोरिन में हिंसा भड़कने के बाद हुई पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि 7 व्यक्तियों के शवों की फिर से पोस्टमॉर्टम जांच कराई जाए. हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि रीपोस्टमॉर्टम के दौरान एम्स, जेआईपीएमईआर या केआईएमएस का एक डॉक्टर भी रहे. मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अन्य छह शवों को भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया है.तूतीकोरिन में हिंसा भड़कने के बाद हुई पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत के मामले में तमिलनाडु पुलिस ने तहसीलदार शेखर और कन्नन के खिलाफ FIR दर्ज की है. FIR के मुताबिक, इन दोनों ने ही 22 और 23 मई को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश दिए थे. इस बीच पूरे मामले की जांच सीबी सीआईडी को सौंप दी गई है.




FIR की कॉपी न्यूज़ 18 के पास मौजूद है. इसमें कहा गया है कि तहसीलदार ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट के तौर पर उस वक्त गोली चलाने के आदेश दिए, जब भीड़ उग्र हो गई थी.


FIR में कहा गया है, “500 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों ने धारा 144 लागू होने के बाद भी स्टरलाइट के ऑफिस में घुसने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों को तीन बार वॉर्निंग भी दी गई लेकिन वो माने नहीं. उन्होंने तोड़फोड़ और गाड़ियों में आग लगाने की कोशिश की. कंपनी के कर्मचारियों और आस-पास के रहने वाले लोगों की जान खतरे में थी. लिहाजा पुलिस को गोली चलाने का आदेश दे दिया गया.
सीबी सीआईडी करेगी जांच
पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत के मामले की जांच सीबी सीआईडी को सौंप दी गई है. इस मामले की जांच सीबी-सीआईडी से कराने की मांग की जा रही थी जिसके बाद तमिलनाडु के डीजीपी टीके राजेंद्र ने यह आदेश जारी किया था. उधर तमिलनाडु सरकार ने तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट कॉपर प्लांट को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश दिया है. सूत्रों की मानें तो तमिलनाडु सरकार के इस फैसले के विरोध में वेदांता ग्रुप कोर्ट में अपील कर सकता है.


तूतीकोरिन में इस प्लांट के खिलाफ महीनों से प्रदर्शन जारी था. पिछले दिनों प्रदर्शन के अचानक हिंसक होने के बाद पुलिस पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी थी जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी और तीस से ज्यादा लोग घायल हुए थे. हिंसा भड़कने के बाद इलाके में धारा 144 लागू हो गई थी और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं. अब इस मामले की जांच सीबी सीआईडी को सौंप दी गई है.


प्‍लांट की वजह से दूषित हो रहा पानी
1997 में शुरू हुई यह कंपनी तूतीकोरिन में कॉपर का खनन करती है. प्लांट की यूनिट में एक स्मेल्टर, एक रिफायनरी, एक फास्फोरस एसिड प्लांट, एक कॉपर रॉड प्लांट और तीन कैप्टिव पावर प्लांट शामिल हैं. स्थानीय लोगों और पर्यावरणीय अधिकारों की रक्षा करने वाले समूहों का कहना है कि इस प्लांट की वजह से ग्राउंड वॉटर और वायु प्रदूषित हो रहा है.


क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये सारा विरोध मार्च में शुरू हुआ, जब कंपनी ने कहा कि वो अपना उत्पादन 4 लाख टन से बढ़ाकर 8 लाख टन प्रति वर्ष करेगी. इसके बाद 29 मार्च को मेंटेनेस के लिए प्लांट को 15 दिनों के लिए बंद कर दिया गया. लेकिन फिर प्लांट 6 जून तक बंद रहा क्योंकि तमिलनाडु प्रदूषण बोर्ड ने पर्यावरण के नियमों का अनुपालन न करने के कारण इसे दुबारा शुरू किए जाने की अनुमति नहीं दी थी.


हालिया विरोध प्रदर्शनों के चलते पीसीबी (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने कंपनी के 25 साल पुराने लाइसेंस को रिन्यू करने से मना कर दिया है. गौरतलब है कि कंपनी के लाइसेंस की समय सीमा इसी साल समाप्त हो रही है. पीसीबी ने लाइसेंस रिन्यू न करने के पीछे 6 कारण बताए हैं जिसमें से एक कारण ये भी बताया गया है कि कंपनी पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं करती है.


बंद होने की कगार पर खड़ी कंपनी स्टरलाइट ने इसके विरोध में अपील की लेकिन उसे खारिज कर दिया गया. इस समय कंपनी ‘तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपीलेट अथॉरिटी’ लाइसेंस को रिन्यू किए जाने का केस लड़ रही है.


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