Monday, 30 July 2018

खतना को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, 'महिलाएं केवल शादी और बच्चों के लिए नहीं'


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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खतना के विरोध में दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि महिला की जिंदगी पति और शादी के लिए ही नहीं है. महिला के अन्य भी इच्छाएं हो सकती हैं. पति के प्रति समर्पण ही महिला का कर्तव्य नहीं है. किसी भी समाज में ऐसी रूढ़ियों की प्रैक्टिस किसी की व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन हैं.देश के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपालन ने भी इस याचिका का समर्थन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान बोहरा मुस्लिम समुदाय में नाबालिग बच्चियों के खतना होने के संस्कार पर सवाल उठाए हैं.


इस याचिका में कहा गया है कि खतना को गंभीर अपराधों की श्रेणी में रखा जाए और इसे गैर जमानतीय अपराधों की श्रेणी में रखा जाए. बता दें सु्प्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मंगलवार को भी होगी.


बता दें औरतों के जननांग में क्लिटोरिस का बहुत अहम रोल है. यह हिस्सा बच्चे पैदा करने से तो नहीं जुड़ा है लेकिन सेक्शुअल इंटरकोर्स के दौरान औरत के ओर्गैज्म में क्लिटोरिस की मुख्य भूमिका होती है. यह एक उभरा हुआ हिस्सा होता जो वजाइना से थोड़ा ऊपर पाया जाता है. खतना करने के लिए क्लिटोरिस का उभरा हुआ हिस्सा काट दिया जाता है.खतना मासूम बच्चियों का किया जाता है, जिनमें तब तक अपने शरीर को लेकर समझ भी पैदा नहीं हुई होती. शारीरिक और मानसिक रूप से बच्चियों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है. बच्चियां इस दर्द को सह नहीं पातीं और हर साल बहुत सी बच्चियां इस दर्द से या तो कोमा में चली जाती हैं या उनकी मौत हो जाती है.


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