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भोपाल [प्रवीण दीक्षित]। बुढ़ापे में कोई आर्थिक संकट न आए, इसलिए जिंदगीभर बचत कर 75 लाख रुपये जोड़े, लेकिन जब रोज गरीब बच्चियों के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसी खबरें पढ़ते तो अंदर तक हिल जाते और आखिर भोपाल के रहने वाले शुक्ला दंपती ने फैसला लिया कि बुढ़ापे के लिए बचाई राशि अब बच्चियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने में खर्च करेंगे और इस तरह शुरू हो गया ‘देवी जागरण’ अभियान। महेंद्र शुक्ला पुलिस अकादमी हैदराबाद के निदेशक रह चुके हैं। पत्नी आशा शुक्ला भी उनका इस काम में भरपूर सहयोग कर रही हैं। दोनों ने गरीब बच्चियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।
खुद की गाड़ी से लाते-छोड़ते हैं
शुक्ला दंपति खुद गरीब बस्तियों से लड़कियों को अपने शिविर में लेकर आते हैं और प्रशिक्षण क्लास के बाद खुद उन्हें घर तक छोड़ने जाते हैं। सेवा भारती द्वारा संचालित आनंद धाम वृद्धा आश्रम में यह देवी जागरण का शिविर लगाया जाता है। यहां मप्र पुलिस की पूजा त्यागी और रेखा बघेल लड़कियों को मार्शल आर्ट के गुर सिखाती हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में सिर्फ मार्शल आर्ट ही नहीं, बल्कि लड़कियों को शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान लड़कियों को गुण-चना जैसा पोष्टिक आहार भी दिया जाता है।

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इसलिए, देवी जागरण अभियान
आशा शुक्ला कहती हैं कि लड़कियों में काफी शक्ति होती है। बस वे उसे पहचान नहीं पाती हैं। हमारा मकसद इन लड़कियों को अपनी ताकत से परिचित कराना है। इसलिए इस अभियान को देवी जागरण नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत अब तक दो सौ लड़कियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और वे अब अपनी बस्तियों में दूसरी लड़कियों को भी प्रशिक्षित कर रही हैं। इस अभियान की सफलता को देखते हुए अब दूसरे राज्यों में भी इस तरह के शिविर लगाए जाने की मांग आ रही है। अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित तीन जिलों में प्रशिक्षण शिविर लगाने की योजना है।

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बढ़ गया आत्मविश्वास
देवी जागरण प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने वाली भोपाल स्थित कराड़िया बस्ती की मुनिया लोधी और गोविंदपुरा की भूमिका कौशिक कहती हैं कि पहले हमें कहीं भी अकेले आने-जाने में डर लगता था लेकिन अब हमारा आत्मविश्वास बढ़ गया है। अब हम न केवल अपनी बल्कि दूसरों की भी रक्षा कर सकती हैं।

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गुड़-चना जैसा पोष्टिक आहार भी मिलता है शिविर में
शिविर में सिर्फ मार्शल आर्ट ही नहीं, बल्कि लड़कियों को शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान लड़कियों को गुड़-चना जैसा पोष्टिक आहार भी दिया जाता है। शिविर में शामिल होने वाली भोपाल स्थित कराड़िया बस्ती की मुनिया लोधी और गोविंदपुरा की भूमिका कौशिक कहती हैं कि पहले हमें कहीं भी अकेले आनेजाने में डर लगता था लेकिन अब हमारा आत्मविश्र्वास बढ़ गया है। अब हम अपने साथ दूसरों की भी रक्षा कर सकती हैं।
By Sanjay Pokhriyal
Article source: http://feedproxy.google.com/~r/Khabar-Cricket/~3/eqPx0VYkYoI/story01.htm
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