Tuesday, 28 August 2018

भीमा कोरेगांव मामला: देशभर में छापे और 3 वामपंथी विचारक गिरफ्तार, जानें अब तक क्या-क्या हुआ?


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भीमा-कोरेगांव हिंसा के मामले में मंगलवार को पुणे पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देश भर में कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर तीन सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार और दो को हिरासत में लिया है. पुलिस ने आरोपियों के घरों से उनके लैपटॉप, मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज़ ज़ब्त किए है. पुणे पुलिस का दावा है की आरोपियों के तार कई बड़े नक्सलियों से जुड़े हो सकते है.कौन हैं वरवर राव और सुधा भारद्वाज?


इस मामले में अब तक पुलिस ने हैदराबाद से कवि और वामपंथी बुद्धिजीवी वरवर राव, फ़रीदाबाद से सुधा भारद्वाज और दिल्ली से गौतम नवलखा को गिरफ़्तार किया है. वहीं ठाणे से अरुण फरेरा और गोवा से बर्नन गोनसालविस को हिरासक में लिया गया है. सुधा भारद्वाज नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एक गेस्ट फ़ैकल्टी के रूप में पढ़ा रही हैं.



Arun Ferreira arrested (image credit: PTI)

दिल्ली हाईकोर्ट का बयान


इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नावलाखा को दिल्ली से दूर ना ले जाया जाए. नावलाखा, पुलिस सुरक्षा में अपने आवास पर ही रहेंगे और उन्हें केवल अपने वकीलों से मिलने की इजाजत होगी.


पुणे पुलिस का दावा है की इन सभी का हाथ एक जनवरी 2018 को पुणे के पास भीमा-कोरेगांव में हुए हिंसा में रहा है. पुलिस की जांच में पता चला की भीमा-कोरेगांव कांड के पीछे नक्सलियों का हाथ है जिसके बाद जून महीने में पुणे पुलिस ने मुंबई, नागपुर और पुणे से पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. इन लोगों के पास से पुलिस को कुछ अहम ई-मेल और दस्ताबेज मिले थे. पुलिस के मुताबिक इन 5 सामाजिक कार्यकर्ताओं से पूछताछ के आधार पर ही मंगलवार को गिरफ्तार हुए लोगों के नाम सामने आए थे और इसी के आधार पर इनके घरों पर तलाशी अभियान की गई.


जून में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिले दस्तावेज़ों से खुलासा हुआ था कि आरोपी किस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साज़िश रच रहे है. इसी कड़ी में पुणे पुलिस ने मंगलवार को कई राज्यों में छापेमारी कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया और दो लोगों को हिरासत में लिया है.


पुणे पुलिस का कहना है की गिरफ्तार हुए आरोपियों को पहले पुणे लाया जाएगा, जहां पर कोर्ट में पेश करने के बाद ज्यादा से ज्यादा दिनों की पुलिस कस्टडी मांगी जाएंगी. पुणे पुलिस भीमा-कोरागांव के साथ-साथ पीएम मोदी को मारने की साज़िश रचने के मामले में भी आरोपियों से पूछताछ कर सकती है. पुलिस का मानना है कि इस मामले में आरोपियों की पूछताछ में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं.
कांग्रेस-सीपीएम ने कहा- ये आपातकाल की शुरुआत


भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में पुणे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरिया और वरनोन गोंजालवेस की गिरफ्तारी की वाम दलों और कांग्रेस ने निंदा की है. सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, ‘लगातार उन दलित कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने मौजूदा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था. हालांकि, मामला अब न्यायालय के अधीन है. लेकिन इस तरह की गिरफ्तारियां देशवासियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है. यह 1975 के आपातकाल से भी बदतर स्थिती है, जब मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ा जा रहा है.’


उधर, कांग्रेस ने भी वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी की निंदा की है. कांग्रेस के सीनियर नेता पीएल पुनिया ने कहा है कि अर्बन नक्सल बताकर लोगों को परेशान किया जा रहा है, ये दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है.


कब और क्यों हुई भीमा कोरेगांव में हिंसा?


महाराष्ट्र में पुणे के नज़दीक कोरेगांव में इस साल ‘भीमा-कोरेगांव’ के 200 साल पूरे होने के खुशी में दलितों ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था. इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे और इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी. आगजनी और पत्थरबाजी शुरू हो गई. इस हिंसा में राहुल फंतागले नाम के एक युवक की मौत हो गई थी.



Dalit groups protesting in wake of Bhima Koregaon violence (image credit: PTI)

इसके बाद दलित संगठनों ने महाराष्ट्र की अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया और महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया था. कहा जाता है कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई एक जनवरी 1818 को ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और पेशवाओं के नेतृत्व वाली मराठा सेना के बीच हुई थी.


Article source: http://hindi.news18.com/news/jharkhand/ranchi/duaria-par-thar-ba-pujariya-kewariya-khola-he-baba-951189.html

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