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भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले निकाले जा रहे किसान मार्च पर वॉटर कैनन के इस्तेमाल और आंसू गैस के गोले छोडे़ जाने पर विपक्षी दलों ने बीजेपी पर निशाना साधा है. मंगलवार को कर्ज माफी से लेकर ईंधन के दामों में कमी की मांगों को लेकर भाकियू के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर मंगलवार को रोक दिया गया. पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार की और आंसू गैस के गोले छोड़े.इस पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत कई दलों ने टिप्पणी की. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘किसान क्रांति यात्रा’ को रोकने के लिए किसानों पर कथित तौर पर बल प्रयोग किए जाने को लेकर मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘किसानों की बर्बर पिटाई’ से भाजपा ने अपने गांधी जयंती समारोह की शुरुआत की है.
राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “विश्व अहिंसा दिवस पर BJP का दो-वर्षीय गांधी जयंती समारोह शांतिपूर्वक दिल्ली आ रहे किसानों की बर्बर पिटाई से शुरू हुआ.” उन्होंने कहा, “अब किसान देश की राजधानी आकर अपना दर्द भी नहीं सुना सकते!”
विश्व अहिंसा दिवस पर BJP का दो-वर्षीय गांधी जयंती समारोह शांतिपूर्वक दिल्ली आ रहे किसानों की बर्बर पिटाई से शुरू हुआ।
अब किसान देश की राजधानी आकर अपना दर्द भी नहीं सुना सकते! #KisanKrantiYatra
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 2, 2018
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इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि किसानों के विरोध मार्च को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकना ‘गलत’ है. उन्होंने शहर में किसानों को प्रवेश देने की वकालत की. गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली विधानसभा में आयोजित एक समारोह से इतर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से क्यों रोका जा रहा है. यह गलत है. दिल्ली सबकी है. उन्हें दिल्ली में आने देना चाहिए. हम उनकी मांगों का समर्थन करते हैं.”
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आंदोलित किसानों से मुलाकात की है और बहुमत मांगों पर सहमति व्यक्त की है. किसानों की नौ में से सात मांगे मान ली गई हैं.
भाकियू नेता राकेश टिकैत ने पुलिस की कार्रवाई पर कहा, “किसानों पर पुलिस की कार्रवाई गलत है. हमारे नेता गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक कर रहे हैं. हम अपने नेताओंके साथ मिल कर चर्चा करेंगे कि आगे का कदम क्या होगा.”
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किसानों के आंदोलन पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि इस सरकार ने किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया इसलिए यह स्वाभाविक है कि किसान विरोध करेंगे. यह दुर्भाग्यपूर्ण है और हम किसानों का पूरी तरह से समर्थन करते हैं.
दिल्ली-यूपी की सीमा पर किसानों और सुरक्षाबलों के बीच हुए हिंसक झड़प पर सीताराम येचुरी ने कहा कि यह इस बात की पुष्टि करता है कि मोदी सरकार किसान विरोधी है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को राहत देने की जगह उन्हें परेशान कर रही है जिससे किसान ऋण के दबाव में आत्महत्या कर सके. आजादी के बाद से अब तक हमने भारत में ऐसा कृषि संकट नहीं देखा था.
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इसके साथ ही पंजाब से आए किसान करतार सिंह ने कहा, “क्या हम वास्तव में खतरनाक हैं? क्या हम शहरी निवासियों के लिए खतरा हैं? पुलिस हमें क्यों मार रही है और हम पर फायरिंग क्यों कर रही है? हम किसी को नुकसान पहुंचाने नहीं आए हैं. हम यहां विरोध करने और अपने अधिकारों पर दावा करने आए हैं. इसके बाद हम चले जाएंगे. एक किसान क्यों किसी की सामान्य जिन्दगी खराब करेगा.”
करतार सिंह ने आगे कहा कि वे लोग कड़ी धूप में काम करने के आदी हैं और इसलिए उन्हें यहां बैठने में कोई समस्या नहीं है. हमें असहज महसूस करा कर आपको कुछ नहीं मिलेगा.
(भाषा इनपुट के साथ)
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