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कश्मीर में पथराव में एक सैन्य जवान के शहीद होने के एक दिन बाद सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शनिवार को कहा कि पत्थरबाज आतंकवादियों के सक्रिय सदस्य हैं और उनके साथ कड़ाई से निपटा जाना चाहिए.जनरल रावत ने पाकिस्तान को सख्त संदेश देते हुए कहा कि यदि इस्लामाबाद सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना जारी रखता है, तो भारतीय सेना ‘अन्य कार्रवाइयों’ का भी सहारा ले सकती है. सेना प्रमुख ने इन्फैंट्री दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से ये बातें कही.
पाकिस्तान के आतंकवादी समूहों द्वारा भारत में सैन्य प्रतिष्ठानों पर आतंकवादी हमलों के बाद सेना ने 28 सितंबर, 2016 को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार आतंकवादी लॉन्च पैडों (सीमा से अवैध घुसपैठ करवाने वाले ठिकाने) पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी.सेना प्रमुख ने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की सहायता और उसे बढ़ावा देने से बचने के लिए भी कहा. उन्होंने कहा कि भारतीय राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए ‘काफी मजबूत’ है कि सीमावर्ती राज्य भारत का हिस्सा बना रहेगा. कोई भी इसे बलपूर्वक या किसी अन्य तरीके से दूर नहीं कर सकता है.
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बता दें कि युवाओं के एक समूह द्वारा गुरुवार को किए गए पथराव के दौरान सेना के जवान राजेंद्र सिंह घायल हो गये थे, जिसके बाद शुक्रवार को श्रीनगर के एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. सेना प्रमुख ने कहा, ‘मैं आपको (पत्थरबाजों) बताना चाहता हूं कि पथराव से किसी का भी फायदा नहीं होगा.’ उन्होंने कहा कि पत्थरबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
जम्मू-कश्मीर में सीमा-पार आतंकवाद को पाकिस्तान के समर्थन के बारे में बात करते हुए जनरल रावत ने सुझाव दिया कि पड़ोसी देश 1971 में भारत के हाथों हुई हार का बदला लेने के लिए ‘छद्म युद्ध’ का सहारा ले रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का उद्देश्य भारतीय सेना को ‘इस छद्म युद्ध में उलझाये रखना है जिसे वे गंवा चुके है.’
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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यह जानते हुए भी जम्मू-कश्मीर में गड़बड़ियों को बढ़ावा दे रहा है कि वे इसमें कभी भी सफल नहीं होंगे. सेना प्रमुख ने कहा, ‘कानूनी तौर पर और सभी अधिकारों से जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है. पाकिस्तान किसी भी तरह से देश के इस हिस्से को हड़पने की कोशिश कर रहा है. बांग्लादेश की मुक्ति के साथ ही पूर्वी पाकिस्तान को खोने के बाद पाकिस्तान इस तरह के अधिक प्रयास कर रहा है.’
उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश की मुक्ति के साथ ही उन्होंने कश्मीर में इसी तरह की स्थिति पैदा करने का फैसला किया. क्या पाकिस्तान सफल रहा है? वे ऐसा नहीं कर पाये हैं. पाकिस्तान को अच्छी तरह से मालूम है कि वे जम्मू-कश्मीर में सफल नहीं हो सकते हैं, लेकिन उन्हें अब भी उम्मीद हैं वे सफल हो सकते हैं.’ (एजेंसी इनपुट)
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