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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बात पर खेद जताया कि एक चुनी हुई सरकार के अधिकारों को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं और गैर-जवाबदेह संस्थानों के पक्ष में शक्ति संतुलन का झुकाव करने का प्रयास किया जा रहा है. जेटली ने कहा, ‘‘अंतत: चाहे केन्द्र हो अथवा राज्य सरकार, चुने हुए की ही जवाबदेही है. जो गैर-जवाबदेह है उसकी कोई जवाबदेही नहीं है.’’अधिकारों की सीमा रेखा के मुद्दे पर जेटली ने कहा कि इसके पीछे सोच यही है कि मूलभूत ढांचे का कोई भी भारतीय सरकार अथवा कोई भी पार्टी उल्लंघन नहीं करेगी. उन्होंने इशारों में कहा कि कई मौकों पर लोकतंत्र के दूसरे स्तंभों के कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण किया गया है.
इस संदर्भ में उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में प्रक्रिया को गलत तरीके से परिभाषित किए जाने की बात कही. इसमें संसद से संबंधित अधिकारों को छीन लिया गया. उन्होंने कहा कई मौकों पर अलग-अलग अधिकार क्षेत्र के सिद्धांत को कई मौकों पर विरूपित किया गया.
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘इस तरह की मंशा को रोका जाना चाहिए. इसके लिए सभी संस्थानों को राजकाज में कुशल होना जरूरी है.’’ संघवाद के बारे में उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण चुनौती है, लेकिन भारत को राज्यों का संघ होना चाहिए और उसमें राज्य और केन्द्र दोनों मजबूत होने चाहिए. उन्होंने कहा, “ इस मामले में मैं कुछ सतर्कता की बात करना चाहता हूं. भारत में संघवाद आवश्यक है. भारत को हमेशा ही राज्यों का संघ होना चाहिए और यह है.’’ये भी पढ़ें: CBI में घमासान: जेटली बोले- सच्चाई का बाहर आना देश के हित में
जेटली ने कहा कि भारत को राज्यों का संघ बनाए रखने में ही संघवाद का संतुलन बना रहेगा. इसे राज्यों का परिसंघ बनाने की दिशा में ले जाने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए.
राजनीति की गुणवत्ता के बारे में जेटली ने कहा जो किसी वंश परंपरा को लेकर प्रतिबद्ध हैं या फिर जो सरकारों को उखाड़ फेंकने वाले वामपंथी दर्शन से संचालित हैं, जो भारत के टुकड़े करने में विश्वास रखते हैं ऐसे लोगों द्वारा लोकतंत्र को नहीं बचाया जा सकता है.
जेटली ने कहा, ‘‘परिवार के सिद्धांतों पर आधारित विरासत वाली जाति आधारित राजनीतिक दलों को भारतीय लोकतंत्र कब तक ढो सकता है? इसका राजनीति की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है.”
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