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राष्ट्रीय महिला आयोग ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को एनआरआई शादियों के संबंध में पत्र लिखकर वैश्विक स्तर पर द्विपक्षीय संधि करने को कहा है. महिला आयोग ने इस पत्र में एनआरआई शादियों के बाद छोड़ी गई विवाहिताओं की परेशानियों का जिक्र किया है.महिला आयोग ने पत्र में लिखा है कि शादियों को लेकर विदेश और भारत में अलग-अलग पर्सनल लॉ को माना जाता है. एनआरआई शादियों और तलाक के मामलों में विदेशी और भारतीय कानून की वजह से दिक्कत आती है.
आयोग ने कहा है कि विदेशी कोर्ट से जारी किए गए एकपक्षीय फैसले जिसमें दूसरे पक्ष(महिला) का मौजूदगी नहीं दर्ज हो पाती, उनके खिलाफ निर्णय आ जाता है. ऐसे में एनआरआई पति विदेशी कानून की मदद से बच निकलते हैं.
(ये भी पढ़ें- कोच ने लड़की को कोड़े से पीटा, महिला आयोग ने दिया नोटिस) विदेशी कोर्ट भारतीय प्रावधानों से अलग हटकर ऐसे में दूल्हे के पक्ष में निर्णय सुना देते हैं जिसकी वजह से विवाहिताओं को तलाक तो मिल जाता है लेकिन मेंटिनेंस नहीं मिल पाता. इससे महिला को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
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आयोग ने विदेश मंत्रालय से इस संबंध में विदेशों से द्विपक्षीय संधि करने को कहा है जिसकी मदद से ऐसे मामलों का निपटारा दोनों देशों के कोर्ट मिलकर सही ढंग से निपटा सकें.
तलाक के ऐसे कई मामले जिनमें विदेशी कोर्ट से तलाक ग्रांट कर दिया जाता है वह भारत में मान्य नहीं होता. भारत में दिया गया तलाक विदेश में मान्य नहीं होता, ऐसे में कानूनी अड़चनें आती हैं.
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