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राम मंदिर पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक टल गई है, इसके साथ ही मंदिर को लेकर सियासी सरगर्मियां भी बढ़ गई हैं. इसी कड़ी में मुलायम सिंह यादव के परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव ने अयोध्या में राम मंदिर की पैरवी करते हुए कहा कि मंदिर बनना ही चाहिए. सत्तासीन पार्टी से मिलती-जुलती राय रखने के सवाल पर उन्होंने तपाक से कहा मैं किसी पार्टी नहीं, बल्कि राम के साथ हूं. छोटी बहू इससे पहले भी एक कट्टर सियासी परिवार में रहने के बावजूद अपनी अलग राय रखने के लिए जानी जाती रही हैं.मूलतः उत्तराखंड की रहवासी अपर्णा साल 2003 में जब अपनी ‘भावी सास’ साधना गुप्ता यादव के जन्मदिन के मौके पर उनके घर पहुंची, तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वक्त उन्हें इसी घर में लाने के तानेबाने बुन रहा है.
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मधुर आवाज की मालकिन अपर्णा ने तब एक गीत गाया. किशोरी अपर्णा के सुरों और चेहरे के लावण्य ने हॉल में सबको बांध लिया, खासकर मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव को. प्रतीक ने ईमेल्स का सहारा लिया और धीरे-धीरे अपर्णा भी प्रतीक के लिए वही आकर्षण महसूस करने लगीं. इनका प्यार सोशल मीडिया पर भी चर्चों की वजह रहा.

अपर्णा यादव- साभार: फेसबुक
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अपर्णा ने अंग्रेजी और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया, जिसके बाद दोनों साथ-साथ डिग्री लेने के लिए यूके पहुंचे. अपर्णा ने मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशन्स में पोस्ट ग्रेजुएट किया तो भावी पति ने लीड्स से एमएससी की. आखिरकार आठ सालों बाद 2011 में पारिवारिक मंजूरी से अपर्णा यादव परिवार की छोटी बहू बन गईं. दिसंबर 2011 में यूपी के सैफई गांव में दोनों की धूमधाम वाली शादी की चर्चा लंबे वक्त तक लोगों की जुबान पर रही, इसमें राजनीति, व्यापार और सिनेजगत की बड़ी-बड़ी हस्तियों ने शिरकत की.

अपर्णा का अपर्णा बिष्ट से अपर्णा विष्ट यादव बनना सपा कुनबे में एक कड़ी जुड़ने तक सीमित नहीं रहा. वे हमेशा से अपने बेबाक बयानों और कामों के कारण चर्चा में रहीं. बाराबंकी में एक संवाददाता सम्मेलन में सपा से एकदम उलट बयान देते हुए अपर्णा ने कहा कि मेरा सुप्रीम कोर्ट पर पूरा यकीन है. मेरा मानना है कि राम मंदिर अयोध्या में बनना चाहिए. वर्तमान पार्ट मुखिया अखिलेश यादव से अलग राय रखना और वो भी राम मंदिर जैसे अतिसंवेदनशील मुद्दे पर बहू के बयान को लेकर सियासी अटकलबाजियां भी होने लगीं. संवाददाता सम्मेलन के दौरान ही उनसे सीधे और तीखे सवाल हुए, मसलन क्या वो बीजेपी के साथ हैं. मुखरता के लिए जानी जाने वाली अपर्णा ने छूटते ही कहा – मैं राम के साथ हूं.
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स्त्री अधिकारों पर काम करने वाले एनजीओ हर्ष फाउंडेशन में एक कैंपेन की ब्रांड एंबेसेडर अपर्णा अपने सामाजिक कार्यों की वजह से अलग छवि रखती हैं. सोशल मीडिया पर किसी भी नए जमाने के लिए सुलझे हुए युवा जितनी ही सक्रिय हैं जो सपा परिवार के लिए एकदम नई बात है.

अपर्णा यादव- साभार: फेसबुक
इससे पहले भी अपर्णा केंद्र सरकार के तीन तलाक फैसले के साथ, यानी सपा परिवार के खिलाफ खड़ी हो चुकी हैं. भारतीय शास्त्रीय संगीत का रोजाना रियाज करती अपर्णा के हाथ सुरों और वीणा पर जितने सधे हुए हैं, अपनी राजनैतिक शुरुआत में भी वे उतनी ही प्रयोगधर्मी नजर आती हैं. बेबाक बोलती हैं, वही करती हैं जो चाहती हैं. फिर बात चाहे राजनाथ सिंह की इफ्तार पार्टी में शामिल होने की हो या फिर पीएम मोदी के साथ सोशल मीडिया पर सेल्फी शेयर करने की.
राज्य और केंद्र में अपने तगड़े राजनैतिक रुतबे और चिर-परिचित अंदाज के लिए जानी जाने वाली पार्टी और खासकर खानदान में छोटी बहू की आवाज अलग सुनाई दे रही है. लोकसभा चुनाव बाट जोह रहे हैं. ऐसे में छोटी बहू की तीखी और बेबाक बयानबाजी राजनैतिक गलियारों में भले चर्चा की आंच सुलगाए, खुद उसका प्रयोगधर्मी इतिहास ये तो साफ करता है कि उसका खानदानी राजनैतिक राह चुनने में थोड़ा कम ही यकीन है.
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Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/hyderabad-ram-mandir-babri-masjid-shree-shree-ravishankar-board-all-india-muslim-personal-law-board-1265651.html
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