Sunday, 25 November 2018

मुंबई हमला: जब मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने साथियों से कहा- ऊपर मत आना, मैं संभाल लूंगा


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मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले के आज 10 साल पूरे हो गए. इस हमले में मेजर संदीप उन्नीकृष्णन शहीद हो गए थे, लेकिन अपने दो मंजिला इमारत वाले घर के कोने-कोने में वह आज भी जिंदा हैं. घर का गलियारा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमांडो की यादों और उनके निजी लेखों से भरा है. वहीं उनकी बहादुरी के किस्से यहां आने वाले हर एक शख्स को बड़े ही गर्व से सुनाए जाते हैं. उन्नीकृष्णन के इन लेखों की यहां मौजूदगी दर्दनाक जरूर है, लेकिन यहां आने वाले लोगों के लिए प्रेरणादायक भी है.मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए हमले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों से लोहा लेते हुए संदीप शहीद हो गए थे. इस ऑपरेशन के दौरान इस जांबाज़ कमांडो ने अपने साथी जवानों से कहा था- ‘ऊपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा.’ संदीप के इन आखिरी शब्दों ने ऑपरेशन में शामिल दूसरे कमांडोज़ पर गहरी छाप छोड़ी.


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संदीप के पिता उन्नीकृष्णन ने अपने बेटे को याद करते हुए कहा कि संदीप का रवैया हमेशा जीतने वाला रहा, बिल्कुल सचिन तेंदुलकर की तरह क्योंकि उसे तेंदुलकर पंसद था.इसरो के रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं, ‘संदीप चाहता था कि हमारा देश हमेशा जीते. जब भारत हारता था, वह निराश हो जाता था. इसरो के असफल होने पर भी वह मुझे सांत्वना देता था. उसे हार पसंद नहीं थी.’


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संदीप के उदार रवैये पर बात करते हुए उन्नीकृष्णन कहते हैं कि वह निरंतर रूप से कई चैरिटेबल संस्थाओं को पैसे दान करता रहता था. मुझे इसका एहसास उसके जाने के बाद हुआ, जब मुझे दान के लिए रिमाइंडर प्राप्त होने लगे.


संदीप को ताज पैलेस होटल पर हमले के दौरान अपनी सूझबूझ और बहादुरी का परिचय देने के लिए 26 जनवरी 2009 को ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया था.


(भाषा इनपुट के साथ)

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