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कर्नाटक में आज होने वाले तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजों का असर राज्य के सियासी हालात पर पड़ने की संभावना है.तीन लोकसभा सीटों- बेल्लारी, शिमोगा और मांड्या के साथ ही रामनगर और जामखंडी विधानसभा क्षेत्रों में शनिवार को मतदान होगा. करीब 6,450 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और कुल 54,54,275 योग्य मतदाता हैं. सभी पांच निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबले में कुल 31 उम्मीदवार हैं. हालांकि, मुख्य मुकाबला कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और बीजेपी के बीच है.
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लोकसभा की तीन में से दो बीजेपी की सीटें, शिमोगा, बीएस येदियुरप्पा और बेल्लारी से बी.श्रीरामालु के इस्तीफे से खाली हुईं, जबकि मंड्या से जेडीएस के एस पुत्ताराजु सांसद थे. तीनों विधायक चुन लिए गए हैं.रामनगर विधानसभा सीट से जेडीएस उम्मीदवार के तौर पर कुमारस्वामी की पत्नी अनीता कुमारस्वामी, जामखंडी सीट पर कांग्रेस के पूर्व विधायक सिद्धू न्यामगौड़ा के बेटे आनंद को टिकट मिली है, जिनके सामने बीजेपी के श्रीसंत कुलकर्णी हैं. वहीं शिवमोगा लोकसभा सीट पर बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई राघवेंद्र को मौका मिला है, जिन्हें जेडीएस के मधु बंगारप्पा चुनौती दे रहे हैं.
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इस उपचुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला करने वाले गठबंधन के दोनों भागीदारों ने इसे मई 2019 आम चुनाव का आगाज करार दिया है और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ इसी तरह के महागठबंधन का आह्वान किया है.
सियासी जानकारों के मुताबिक, जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन अगर दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट भी जीत लेती है तो गठबंधन सरकार लोकसभा चुनावों तक चल सकती है, जबकि अगर उपचुनावों के बाद सरकार गिर जाती है तो बीजपी को जाहिर तौर पर इसका फायदा मिल सकता है. लिहाजा वो हर तरह से गठबंधन को पटखनी देने की कोशिश करेंगे. (भाषा इनपुट के साथ)
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