Saturday, 25 August 2018

सेना ने छुपाई वैकेंसी, कोर्ट के जरिए मेजर जनरल को रिटायर होने के 18 साल बाद मिला प्रमोशन


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देबायन रॉयसेना से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक अफसर को रिटायर होने के 18 साल बाद प्रमोशन मिला है. ऐसा इसलिए हुआ क्‍योंकि सरकार ने अधिकारी के गलत दस्‍तावेज पेश किए. इस मामले में आर्म्‍ड फॉर्सेज ट्रिब्‍यूनल(एएफटी) बेंच ने अपने फैसले में कहा कि से यह न केवल सैन्‍य अधिकारी के प्रति अन्‍याय बल्कि अदालत से तथ्‍य छुपाने का मामला भी है. इसके चलते कोर्ट व मेजर जनरल से दगाबाजी हुई.


मेजर जनरल नारंग को जनवरी 1997 में मेजर जनरल के रूप में पद से रिटायर होने को कहा गया. उन्‍हें बताया गया कि लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक पर कोई जगह खाली नहीं है. अब सरकार को मेजर जनरल नारंग को 18 साल प्रमोशन देने का आदेश दिया गया है. 1997 में नारंग इंजीनियर्स कॉर्प्‍स से जुड़े हुए थे. उन्‍होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जिसे बाद में एएफटी में भेज दिया गया.


याचिका में दावा किया गया कि कॉर्प्‍स के लिए तीन पद खाली थे जिनमें से एक डायरेक्‍टर जनरल बॉर्डर रोड्स(डीजीबीआर) भी था. बाद में डायरेक्‍टर जनरल नेशनल कैडेट(डीजीएनसीसी) का पद भी खाली हो गया था.नारंग ने आगे कहा कि डीजीएनसीसी का पद पांच महीने तक खाली रखा गया और बाद में एक जूनियर अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल बीएस मलिक को प्रमोशन देकर यहां नियुक्‍त किया गया. मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल एफिडेविट में कई खामियां उजागर हुई.


ट्रिब्‍यूनल ने अपने फैसले में लिखा कि सरकार ने हाईकोर्ट में गलत एफिडेविट दाखिल किया था. इस एफिडेविट में बताया गया कि कॉर्प्‍स ऑफ इंजीनियर्स के लिए दो पद खाली थे लेकिन हकीकत में तीन पद थे. आगे एक और झूठ पकड़ा गया. इसके तहत ट्रिब्‍यूनल ने कहा कि सरकार ने एक अन्‍य मामले में हाईकोर्ट में कहा था कि लेफ्टिनेंट जनरल के चार पदों सहित कुल 56 पद खाली थे. इस तथ्‍य को एएफटी से छुपाया गया जहां केवल 52 पद ही बताए गए.


जस्टिस एमएस चौहान और लेफ्टिनेंट जनरल मनीष सिबल की एएफटी बेंच ने कड़े शब्‍दों मे अपने आदेश में कहा कि सरकार ने न केवल याचिकाकर्ता से अन्‍याय किया बल्कि कोर्ट से भी झूठ बोला. एएफटी ने अधिकारी को प्रमोशन की रैंक देने का आदेश देते हुए सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.


इस केस से 90 के दशक में मुलायम सिंह यादव की सरकार के रक्षा मंत्रालय के जरिए सुरक्षा बलों में दखल देने के मामले से भी खुलासा होता है. हालांकि जनरल वीपी मलिक के सेनाध्‍यक्ष बनने के बाद विवाद समाप्‍त हुए.


लेकिन मेजर जनरल नारंग का मामला इकलौता नहीं है जिसमें सेना में प्रमोशन के मामले में गड़बड़ी हुई. 2016 में भी ऐसा ही मामला आया था. उसमें 2002 में रिटायर हुए आर्मी एविएशन कॉर्प्‍स के एक ब्रिगेडियर को 14 साल बाद मेजर जनरल के रूप में प्रमोट किया गया. मेजर जनरल वीके शर्मा का मामला भी ऐसा ही है. वे 30 अप्रैल 1996 को रिटायर हुए थे.


Article source: https://www.jagran.com/west-bengal/jalpaiguri-18201896.html

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