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एक युवती के साथ होटल में जाने की कोशिश करते पकड़े गए मेजर लीतुल गोगोई को सेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है. कोर्ट ने सोमवार को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. इसके बाद दस्तकार फारूक अहमद डार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. डार का कहना है कि आखिरकार उनके साथ न्याय हुआ. बता दें कि फारूक अहमद डार वही हैं, मेजर गोगोई ने पिछले साल जिनका इस्मेताल जीप की बोनट पर मानव कवच के रूप में किया था.डार ने कहा, ‘‘मैं अल्लाह का शुक्रगुजार हूं. जिस व्यक्ति ने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया, उसे आखिरकार ईश्वर की नाराजगी का सामना करना पड़ा. ईश्वर का न्याय करने का अपना तरीका है.’’
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डार (28) ने कहा कि थल सेना को उसके मामले को भी करूणा के आधार पर देखना चाहिए और असंतोष पैदा करने वाली घटना उसकी जुबानी सुनी जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां तक भी आश्वस्त नहीं हूं कि क्या मैं फिर से सामान्य जीवन शुरू करने में सक्षम हूं. लेकिन मैं खुश हूं कि ईश्वर ने आखिरकार मुझे न्याय दिया. मेरी तबाही के लिए जिम्मेदार व्यक्ति भी आखिरकार शर्मसार हुआ.’’बता दें कि गोगोई द्वारा डार को मानव कवच के रूप में इस्तेमाल किए जाने का एक वीडियो लोगों के बीच आने के बाद उसके पड़ोसियों ने उससे दूरी बना ली थी. डार ने कहा, ‘‘थल सेना का मेजर अपनी शक्ति को लेकर अहंकार में था और खुद को मेरा सृजनकर्ता जैसा मानता था. हालांकि, वह नही जानता था कि उसकी लाठी में आवाज नहीं है. ’’
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दरअसल, पिछले साल नौ अप्रैल को गोगोई के नेतृत्व वाली एक टीम ने मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में भारी पथराव से बचने के लिए डार को थल सेना की एक जीप की बोनट से बांध दिया था और उसका मानव कवच के रूप में इस्तेमाल किया था. इस घटना की तस्वीर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बनी थी.
श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में वह चुनाव का दिन था. डार ने कहा कि वह अलगाववादी संगठनों के बहिष्कार की परवाह नहीं करते हुए अपना वोट डालने जा रहे थे. उस दिन पुलिस गोलीबारी में आठ लोग मारे गए थे.
केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय पुलिस की जांच में उस दिन के घटनाक्रम के बारे में डार के बयान का समर्थन किया गया है, जिससे सेना के इस दावे पर सवाल उठता है कि वह एक पत्थरबाज था.
जांचकर्ताओं ने पाया कि डार मतदान के बाद अपनी बहन के यहां जा रहा था तभी सेना ने उसे उठा लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई की. इसके बाद उसे रस्सियों से बांध दिया और करीब 28 गांवों में घुमाया. डार ने कहा, ‘‘मैं अपनी गलत नहीं समझ पा रहा. क्या मतदान केंद्र तक जाना और अपना वोट डालना गुनाह है.’’
वहीं, गोगोई को पुलिस ने इस साल 23 मई को हिरासत में लिया था. दरअसल, एक होटल के रिसेप्शन पर गोगोई की उस वक्त कहासुनी हुई थी जब वह 18 साल की एक लड़की के साथ कथित तौर पर वहां गए थे. (एजेंसी इनपुट)
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