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गुजरात के पाटीदार आंदोलन के ठीक तीन साल बाद हार्दिक पटेल इस बार अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं. 2015 में पाटीदार आंदोलन ने वांछित परिणाम नहीं दिए लेकिन हार्दिक के वर्तमान अनिश्चितकालीन अनशन का उद्देश्य अलग है. ऐसा लगता है कि हार्दिक अगले लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी कर रहे हैं और उनका उद्देश्य कांग्रेस से लोकसभा टिकट पाने का है.यह बात ऐसे ही नहीं कही जा रही है. दरअसल, इसके पीछे कई कारण मौजूद हैं. पहला तो यह है कि हार्दिक द्वारा शुरू किया गया पाटीदारों के आरक्षण का मुद्दा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है. दूसरा हार्दिक पर कई मामले चल रहे हैं, उनपर राजद्रोह जैसा गंभीर मामला दर्ज है, जो उनके लिए मुसीबत बन सकते हैं. सबसे बड़ी बात आम चुनाव अब दूर नहीं है और हार्दिक पटेल की उम्र इतनी हो चुकी है कि वह लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं.
सोमवार को हार्दिक पटेल के अनिश्चितकालीन अनशन का तीसरा दिन था. अनशन स्थल पर उनके 300 समर्थक भी नहीं थे. आरजेडी व टीएमसी नेताओं के साथ कांग्रेस के कुछ विधायक हार्दिक पटेल से मिलने पहुंचे. टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी ने हार्दिक पटेल को ममता बनर्जी द्वारा भेजी गई राखी दी.
बता दें कि जब हार्दिक पटेल को अहमदाबाद या गांधीनगर में अनशन करने की इजाजत नहीं मिली, तो कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल के पास गया और ज्ञापन देकर सरकार की आलोचना की. कांग्रेस का तर्क था कि हार्दिक पटेल के संवैधानिक अधिकार का हनन किया जा रहा है. बीजेपी अब हार्दिक के अनशन को कांग्रेस प्रायोजित बता रही है.राजनीतिक विश्लेषक हरी देसाई हार्दिक के इस अनशन को खुद को राजनेता के तौर पर पेश करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं. न्यूज18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पाटीदार समुदाय का छोटा सा हिस्सा ही हार्दिक पटेल के समर्थन में है. इसलिए वह कांग्रेस के साथ जाकर अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं.
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हालांकि, अपने ऊपर लगे आरोपों के जवाब में हार्दिक का कहना है कि अनशन का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है. यह दो उद्देश्यों किसानों की ऋण माफी और पाटीदारों के आरक्षण के लिए किया जा रहा है. उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि गुजरात की बीजेपी सरकार उनके अनशन को फेल करने के लिए पीएएएस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर रही है.
वहीं, पुलिस का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएएएस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि, पुलिस ने गिरफ्तार पीएएएस कार्यकर्ताओं की संख्या हार्दिक द्वारा बताई गई संख्या से काफी कम बताई. इंटेलिजेंस ब्यूरो के डीजेपी ने कहा कि 2015 में भी हार्दिक को शांतिपूर्ण रैली की इजाजत दी थी, लेकिन तब राज्य में व्यापक हिंसा हुई थी.
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