Wednesday, 1 August 2018

NRC पर देशभर से अलग है असम का महौल, नहीं बदला आम जनजीवन


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पूरे देश में असम के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के मसौदे से गायब नामों को लेकर चर्चा जारी है. संसद में माहौल इतना गरमा गया कि बहस तक नहीं हो पा रही है. लेकिन जहां ये सब हुआ है वहां का माहौल कुछ अलग ही है. यहां ऐसा लग रहा है कि कुछ नहीं हुआ है और जीवन जैसे था वैसा ही चल रहा है.सोमवार को जब एनआरसी का फाइनल मसौदा जारी किया गया तो यहां के 40 लाख लोगों का नाम उसमें नहीं था. हालांकि, जिनके नाम नहीं हैं वे 8 अगस्त से पहले अपनी आपत्तियां दायर कर सकते हैं. दिल्ली में भले ही नेताओं ने संसद को ठप कर दिया हो लेकिन असम में नजारा अलग है. जिनके नाम सूची में है वे जश्न मना रहे हैं.


क्या है असम समझौता?


जिनके नाम मसौदे में हैं वे मिठाइयां बांटते देखे गए. कहीं-कहीं लोग इसकी खुशी में कीर्तन भी करा रहे हैं. लेकिन जिनके नाम नहीं हैं वे कोई हंगामा नहीं कर रहे. उन्हें उम्मीद है सरकार कुछ करेगी. उन्हें ये भी लग रहा है कि आपत्ति दर्ज कराने के बाद सब ठीक हो जाएगा.एक स्थानीय नागरिक का कहना है, “ हमें अंदर से लग रहा था कि हमारे नाम मसौदे में नहीं होंगे. हमारे गांव, कमांडांगा, धुबरी के बहुत से लोग यही सोच रहे थे. लेकिन जब मसौदा आया तो हममे से 92 फीसदी लोगों के नाम उसमें थे. जिन लोगों के नाम सूची में नहीं है वे पश्चिम बंगाल के हैं. ये भी पश्चिम बंगाल सरकार की गलती है कि उसने हम लोगों को सही दस्तावेज नहीं दिए. हमें कोलकाता जा कर फिर से अपने कागज वेरीफाई कराने होंगे. मुझे लगता है फिर नाम आ जाएगा. ये सब राजनीति का खेल है, हम किसी को यहां की शांति को खराब नहीं करने देंगे.”


बहरहाल, इस मसौदे में 40 लाख लोगों के नाम नहीं है. इसे लेकर राजधानी और खास तौर से संसद में हंगामा मचा हुआ है.


ब्यूरो इनपुट के साथ सुभाशीष भट्टाचार्जी


Article source: http://ibnlive.in.com/news/us-industry-reviewing-supreme-court-decision-on-novartis/382871-2.html

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