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(भवदीप कांग)यह कांग्रेस का सौभाग्य ही है कि यहां राजनीतिक शख्सियतें 60 साल की उम्र में रिटायर नहीं होती. अगर वह रिटायर हो भी जाएं तो पार्टी को रुपयों की व्यवस्था करने वाले, इलेक्शन मैनेजर और बड़ी संख्या में लोगों को बुलाना, मध्यस्थता करने वाले और संकट मोचक खोजने में काफी दिक्कत हो जाएगी. कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालते वक्त राहुल गांधी ने वादा किया था कि वह ‘योग्य’ युवाओं के जरिए नई कांग्रेस बनाएंगे.
अहमद पटेल संक्षिप्त राजनीतिक वनवास के बाद वपासी कर चुके हैं. इतना ही नहीं 89 वर्षीय मोतीलाल वोरा की जगह 69 वर्षीय पटेल और 87 वर्षीय कर्ण सिंह की जगह 65 वर्षीय आनंद शर्मा को लाना पीढ़ी का अंतर है! कांग्रेस मुख्यालय में एस जयपाल रेड्डी की बतौर प्रवक्ता फिर से वापसी हो चुकी है. जय राम रमेश साल 2019 चुनाव के लिए ‘वॉर रूम’ तैयाक कर रहे हैं. परिवार के करीबी लुइजिन्हो फलेरो को फिर से पूर्वोत्तर का प्रभारी बनाया गया है. वहीं बीते 4 कांग्रेस अध्यक्षों के साथ काम कर चुके अहमद पटेल, पांचवे अध्यक्ष के साथ काम करेंगे. अब पार्टी में वह बतौर कोषाध्यक्ष काम करेंगे.
ये भी पढ़ें : कांग्रेस ने ट्वीट की राहुल की ये तस्वीरें तो लोगों ने लिए मजे, BJP ने भी किया रिट्वीटसबसे पुरानी पार्टी पीढ़ी के बदलावों के आदी है. आखिरकार, राहुल नेहरू-गांधी की पांचवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं,लेकिन राजनीति में प्रवेश करने के 14 साल बाद और साढ़े पांच साल बाद उन्होंने प्रभावी ढंग से बागडोर संभाली. फिर भी अभी पार्टी पर उनकी छाप लगना बाकी है. उन्होंने नेताओं को ताश के पत्तों की तरह फेंटा है और आखिर में मां के बनाए रास्ते पर चले.
बतौर उपाध्य्क्ष राहुल गांधी ने अपनी कोर टीम बनाई जिसमें मधुसूदन मिस्त्री, मोहन प्रकाश, सीपी जोशी, बीके हरिप्रसाद समेत कई लोग थे. बतौर अध्यक्ष राहुल ने इन सभी नामों से किनारा करते हुए वरिष्ठ और विश्वसनीय नेताओं पर आजमाइश की है. जब कर्नाटक में त्रिकोणीय परिणाम आए तो गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत को जेडी(एस) से बात करने के लिए भेजे गए. इसी तरह मेघालय में पटेल और कमलनाथ को भेजा गया जहां उनके पास सीटें कम थीं. गुजरात में कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत ने बीजेपी से 16 सीटें छीन लीं.
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कांग्रेस कार्यकारिणी समिति (सीडब्ल्यूसी) वरिष्ठ नागरिकोंस का समूह है जिसमें मोतीलाल वोरा, 75 वर्षीय अंबिका सोनी ,76 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे, 70 वर्षीय हरीश रावत, 74 वर्षीयओमन चांडी , 69 वर्षीयगुलाम नबी आजाद, 67 वर्षीय अशोक गेहलोत और 65 वर्षीय दीपक बाबरिया शामिल हैं. सबसे कम उम्र के सदस्य 60 वर्षीय अविनाश पांडे , 58 वर्षीय मुकुल वासनिक और 55 वर्षीय महासचिव केवी वेणुगोपाल हैं.
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/karobar/no-chnages-in-monetary-policy-448612.html
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