Monday, 27 August 2018

मुस्लिम ब्रदरहुड की टिप्पणी के बाद RSS का जवाब- राहुल न संघ को जानते हैं न भारत को


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भविष्य के भारत की दिशा और दशा कैसी हो इसे लेकर आरएसएस अगले महीने तीन दिनों के लिए एक कॉनक्लेव का आयोजन करेगी. आरएसएस ने हमेशा कहा है कि वह बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के एक सामाजिक सांस्कृतिक संगठन है.तीन दिनों तक चलने वाली इस मीटिंग का आयोजन दिल्ली के विज्ञान भवन में 17 से 19 सितंबर के बीच किया जाएगा. इस मीटिंग में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहेंगे.


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आरएसएस का यह कार्यक्रम ऐसे समय में होने जा रहा है जब राहुल गांधी लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर उनकी नीतियों को लेकर हमले बोल रहे हैं. यही नहीं यूरोप दौरे पर एक बार बातचीत के दौरान उन्होंने आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी.लंदन में राहुल गांधी ने कहा था, ‘आरएसएस देश के स्वभाव को बदलने की कोशिश कर रही है. इसके विचार मुस्लिम ब्रदरहुड के विचारों जैसे ही हैं.’ गौरतलब है मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र में स्थापित एक सुन्नी इस्लामिक संगठन है, जिसे रूस सहित छह एशियाई देश आतंकवादी संगठन मानते हैं.


कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोगों को जोड़ने का काम करती है जबकि बीजेपी-आरएसए उन्हें तोड़ने और उनके बीच घृणा फैलाने का काम करते हैं. वे नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोग सभी मंत्रालयों और विभागों में हैं और नोटबंदी के लिए यही लोग ज़िम्मेदार हैं.


आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने सोमवार को दिल्ली में  मीडिया को बताया कि राहुल न तो संघ को जानते हैं और न ही भारत को जानते हैं. उनकी बातों में किसी तरह की कोई गंभीरता नहीं है और उन्हें इस्लामिक आतंकवाद के बारे में जानकारी भी नहीं है.


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अरुण कुमार ने कहा, ‘नौजवानों के मन में आरएसएस को जानने की उत्सुकता बढ़ रही है. संघ का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन कुछ दूसरी पार्टियों से जुड़े लोगों ने संघ को राजनीति से जोड़ दिया है जो कि अनावश्यक है. ऐसी स्थिति में हमें लगा कि जाने-माने लोगों से मीटिंग होनी चाहिए.’


जबकि बीजेपी अक्सर कहती रही है कि उसे कांग्रेस मुक्त भारत चाहिए आरएसएस इसे राजनीतिक बयान कह रही है. अप्रैल में मोहन भागवत ने कहा था कि ‘मुक्त’ जैसी भाषा का प्रयोग राजनीति में किया जाता है. आरएसएस इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करती.


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