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मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐसे शख्स की सज़ा माफ कर दी है जिस पर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था. निचली अदालत ने से इस शख्स को 10 साल की सज़ा मिली थी.पत्नी अपने पति के एक्सट्रामैरिटल अफेयर से परेशान थी. ऐसे में उन्होंने अपनी 18 महीने की बेटी के साथ साल 2003 में कूदकर जान दे दी.
हाल के एक आदेश में, न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का अवैध संबंध आईपीसी की धारा 498 ए के तहत क्रूरता के दायरे में नहीं आएगा.
आईपीसी की धारा 306, (आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला) का जिक्र करते हुए न्यायाधीश ने कहा, “धारा 306 के तहत अपराध बनाने के लिए अभियोजन पक्ष को ये साबित करना होगा कि मृतक ने आत्महत्या की है और आरोपी ने आत्महत्या के लिए उकसाया है.”जज ने आगे ये भी कहा, “लेकिन कथित एक्सट्रामैरिटल अफेयर संबंधों के लिए, अभियोजन पक्ष ने ऐसा कोई सबतू नहीं दिया जिससे ये साबित हो सके कि अभियुक्त ने आत्महत्या करने के लिए पत्नी को उकसाया, उत्तेजित या प्रेरित किया था.”
जज ने फैसला सुनाते हुए आगे ये भी अगर एक्सट्रामैरिटल अफेयर साबित हो भी जाते हैं तो भी तो भी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ये कहा जाए कि आत्महत्या के लिए उसनी अपनी पत्नी को उकसाया.
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