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बड़े बड़े मामले सुलझाने वाली देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में दो शीर्ष अधिकारियों के बीच घमासान, केंद्र सरकार द्वारा दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजा जाना और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का मुद्दा इन दिनों सुर्खियों में है. पेश है सीबीआई के वर्तमान घटनाक्रम पर एजेंसी के पूर्व संयुक्त निदेशक के माधवन से पांच सवाल और उनके जवाब:प्रश्न: सीबीआई में वर्तमान घटनाक्रम पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: सीबीआई में जो कुछ भी हो रहा है, उसमें मुझे लगता है कि संबंधित अधिकारी निजी विषयों एवं व्यक्तिगत बातों के आधार पर बोल रहे हैं और चीजों को आगे बढ़ा रहे हैं. इन बातों का दफ्तर के काम से कोई लेना देना नहीं है. बाकी बातें अदालत में हैं और इसपर कुछ कहना ठीक नहीं है.
प्रश्न: क्या अधिकारियों के टकराव एवं सरकार के हस्तक्षेप से सीबीआई का कामकाज प्रभावित हो रहा है?उत्तर: वर्तमान घटनाक्रम में सरकार के हस्तक्षेप के बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है. लेकिन जहां तक एजेंसी में निदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारियों का सवाल है, ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अधिकारियों को सीबीआई जैसी एजेंसी में काम करने का कोई विशेष अनुभव नहीं होता है. सीबीआई में दो-तीन साल के लिए आते हैं और उसके बाद चले जाते हैं. अनुभव की कमी के कारण काम पर असर तो पड़ता है.
प्रश्न: केंद्रीय जांच एजेंसी में निदेशक एवं वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति के लिए आपका क्या सुझाव है?
उत्तर: मेरा मानना है कि सीबीआई में जो भी निदेशक बने, उसे 5 से 10 वर्ष का इस एजेंसी में काम करने का अनुभव होना चाहिए. तभी वे चीजों को उचित तरीके से देख सकेंगे और आगे बढ़ा पाएंगे.
प्रश्न: क्या सीबीआई के कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप है और क्या एजेंसी पर काम का बोझ अधिक है?
उत्तर: पहले तो कोई ऐसी समस्या नहीं थी, मेरा अपना ऐसा कोई अनुभव नहीं है. अब ऐसी जो खबरें आ रही हैं, उस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता. जहां तक सीबीआई पर काम के बोझ का सवाल है, पिछले दशकों में काम बढ़ा है. जितनी मांग है, उतने लोग नहीं हैं. एजेंसी में जब लोग कम होंगे तब काम पर असर पड़ेगा ही.
प्रश्न: क्या सीबीआई में सुधार एवं एजेंसी को अधिक स्वायत्तता की जरूरत है?
उत्तर: समय के साथ बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए ढांचागत सुधार तो सभी संस्थाओं में होने चाहिए और सीबीआई में भी ऐसा होना चाहिए. लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी को सरकार के तहत ही काम करने की जरूरत है.
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