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निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि कमलनाथ की याचिका में फर्जी दस्तावेज अदालत में जमा किए गए. आयोग ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के संबंध में कांग्रेस नेता कमलनाथ की ओर से दायर याचिका में फर्जी दस्तावेज दायर कर अनुकूल फैसला पाने और चुनाव निकाय की छवि खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं.कोर्ट ने चुनाव आयोग के दावों पर गहरी आपत्ति जताई और चेतावनी दी कि उस कंपनी को बुलाया जा सकता है जिसने कथित रूप से मतदाताओं के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं और दोहराव को रेखांकित किया है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि दस्तावेजों को जमा करने में कुछ भी गलत नहीं है और डुप्लिकेट मतदाताओं के आंकड़े, जैसा एक निजी कंपनी द्वारा इंगित किया गया है, मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत को दिए गए हैं.
जस्टिस एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह से कहा कि वह रावत से जानकारी प्राप्त करें कि क्या ऐसे दस्तावेज उन्हें दिए गए थे या सीधे अदालत में दिए गए थे.सुनवाई के दौरान विकास सिंह ने कहा कि यह गंभीर बात है जिसे वह अदालत में उठाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 193 (गलत सबूत के लिए सजा) है. उन्होंने कहा कि इसके लिए किसी से गंभीरता से पूछताछ होनी चाहिए.
विकास सिंह ने मध्यप्रदेश में मतदाताओं के संबंध में कुछ दस्तावेज पेश किए और कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह प्रचारित करने की कोशिश की गयी कि बोगस मतदाता हैं.
सिंह ने कहा कि ‘राजनीति डॉट इन’ नामक निजी कंपनी ने मतदाताओं के आंकड़ों को चित्रों के साथ प्रकाशित किया है जैसा चुनाव आयोग नहीं करता. यहां याचिकाकर्ता ने अनुकूल आदेश पाने और निर्वाचन आयोग को बदनाम करने के लिए ऐसे जाली दस्तावेजों पर आधारित आंकड़े जमा कराए.
कमलनाथ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि आंकड़े सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं और याचिकाकर्ता ने इसे रावत को भी दिया है.
सिब्बल ने कहा, ‘हमने इसे निर्वाचन आयोग के ध्यान में लाया है और उन्होंने हमारे प्रतिनिधित्व का जवाब भी दिया है. इसे ध्यान में लाने में क्या गलत है.’
पीठ ने यह पता करने को कहा कि क्या ओपी रावत को भी दस्तावेज सौंपे गए थे. इस संबंध में आठ अक्टूबर तक सूचना देने को कहा गया है.
Article source: http://feedproxy.google.com/~r/Khabar-Cricket/~3/yKYdXdiGVvc/story01.htm
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