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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सकारात्मक बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पूरे मामले में जो कदम उठाएं हैं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन्हें ही बल देता है.जेटली ने कहा कि सीबीआई में हाल में हुए घटनाक्रम से उसकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है. उन्होंने कहा, ”सीबीआई विवाद में सच्चाई का बाहर आना देश के हित में जरूरी है. सीवीसी जांच से सच सामने आ जाएगा. हमारा देश ये अफॉर्ड नहीं कर सकता है कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी के दो बड़े अधिकारी खुद जांच के घेरे में आ जाएं”.
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा की अर्जी पर शुक्रवार को सीबीआई, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया.
वित्त मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”आज जो सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है वो एक बेहद सकारात्मक कदम है. एक ही केस में एजेंसी के निदेशक का एक मत और विशेष निदेशक का दूसरा मत है. वो एजेंसी जो करप्शन की जांच करती है उसी के दो बड़े अधिकारियों पर आरोप लगे तो उसकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है. सीवीसी के सामने सीबीआई अकाउंटेबल है. इसपर सीवीसी ने फैसला दिया जिसे सरकार ने स्वीकार किया”.सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया है फैसला?
न्यायालय ने निर्देश दिया कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक बनाए गए एम. नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसला नहीं करेंगे. बीते 23 अक्टूबर से अब तक राव की ओर से किए गए फैसलों पर अमल नहीं होगा और उनके सारे फैसले एक सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जाएंगे.
अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए. के. पटनायक सीबीआई अधिकारियों के बीच लग रहे आरोप-प्रत्यारोप की सीवीसी जांच की निगरानी करेंगे और दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट न्यायालय में सौंपनी होगी. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख तय कर दी.
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