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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि आज महिलाओं की आजादी के लिए हो रहे तमाम आंदोलनों को प्रेरणा महर्षि दयानंद से मिली है. 19वीं सदी में ही महर्षि दयानंद ने महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए महिलाओं को पुरुषों के समान बताया था.राष्ट्रपति कोविंद राजधानी दिल्ली में बृहस्पतिवार शुरू हुए चार दिवसीय 11वें वैश्विक आर्य समाज सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे. राष्ट्रपति ने कानपुर में आर्य समाज के संस्थान में ली गई अपनी उच्च शिक्षा का जिक्र किया. कहा कि अंधविश्वास, कुरीतियों के खिलाफ और महिला सशक्तिकरण जैसी आधुनिक सोच के साथ शुरू हुए महर्षि दयानंद सरस्वती के महाअभियान को आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है.
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी अपने जीवन और आंदोलनों में महर्षि दयानंद की परंपरा को ही आगे बढ़ाया. कोविंद ने आर्य समाज को आधुनिक दौर का सबसे प्रासंगिक संगठन बताते हुए कहा कि पंथ, संप्रदाय, जाति-पाति जैसे बंधनों से मुक्त कर आर्य समाज मानव जाति को आर्य यानी श्रेष्ठ बनाने में सक्रिय है.
आर्य समाज सम्मेलन 28 अक्टूबर तक चलेगाभारत को विश्व गुरू बनाने के लिए महर्षि दयानंद ने जो मंत्र दिए थे उन्हीं की राह पर चलकर देश आज बुलंदियों पर पहुंच रहा है. आर्य समाज की यज्ञ और शांति पाठ की परिकल्पना दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरण की समस्या को मिटाने में अहम है.
राष्ट्रपति के उद्घाटन भाषण के बाद स्वागत समिति के अध्यक्ष महाशय धर्मपाल ने राष्ट्रपति की एक तस्वीर और स्मृति चिन्ह उन्हें भेंट किया. केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, सत्यपाल सिंह, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के सुरेश चंद्र आर्य ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया. दिल्ली के रोहिणी में आयोजित कार्यक्रम में 32 देशोँ से आए आर्य समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए. सम्मेलन 28 अक्टूबर तक चलेगा, जिसका समापन गृहमंत्री राजनाथ सिंह करेंगे.
सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा (एसएपीएस) द्वारा आयोजित इस वैश्विक आर्य समाज सम्मेलन में आर्य समाज से जुड़े प्रतिनिधि देश के सामाजिक रूप से प्रासंगिक मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण बता रहे हैं. आर्य समाज की स्थापना करीब डेढ़ सौ साल पहले महर्षि दयानंद सरस्वती ने की थी. आज, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, रूस, कनाडा, नेपाल, थाईलैंड, म्यांमार, नीदरलैंड, गुयाना, त्रिनिदाद, केन्या, तंजानिया, युगांडा, दक्षिण अफ्रीका, मलावी, मॉरीशस, अर्मेनिया जैसे देशों में आर्य समाज के लोग कार्यरत हैं.
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