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सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान आलोक वर्मा के वकील फली नरीमन ने अपना पक्ष रखते हुए विनीत नारायण केस का हवाला दिया. मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम इस मामले की जांच करेंगे.हमें यह देखना होगा कि सीवीसी की तरफ से किस तरह का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने सीवीसी को जांच पूरी करने के लिए दस दिन का समय दिया है. इसी के साथ यह भी कहा गया है कि तब तक नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे. कोर्ट के इस फैसले के बाद सीवीसी ने तीन हफ्तों का समय मांगा. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया.
गौरतलब है कि वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने तथा अंतरिम प्रभार 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी तथा एजेंसी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सौंपे जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है.
यह भी पढ़ें: राहुल के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार, हर रोज झूठ बोलने का लगाया आरोपवर्मा ने अपनी याचिका बुधवार को दायर की थी. उनकी याचिका पर सुनवाई गैर सरकारी संगठन की याचिका के साथ ही होगी. जांच एजेंसी के निदेशक ने अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि एजेंसी के प्रमुख और विशेष निदेशक को छुट्टी पर भेजने के अलावा संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे अधिकारियों को भी बदल दिया गया है. अदालत में वर्मा का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बुधवार को तत्काल सुनवाई की मांग की और उल्लेख किया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने कल सुबह छह बजे वर्मा के अधिकार वापस लेने का फैसला किया.
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