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सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार मान रही है कि जो फैसला उसने लिया था सर्वोच्च न्यायालय का आदेश उसी से मिलता है. सरकार ये भी मानती है कि सीवीसी और केन्द्र सरकार के आदेश पर अदालत ने किसी भी तरीके की रोक नहीं लगाई साथ ही सीवीसी को इस मामले में जांच करने के आदेश में भी कोई बदलाव नहीं है.जहां तक रिटायर्ड जज को जांच में शामिल करने की बात है तो सरकार का रुख इसमें ये है कि चूंकि ये केस जटिलताओं से भरा हुआ है और दो आला अधिकारियों के शिकायत का आंकलन किया जा रहा है तो इसमें कोई कोताही नहीं बरती जा सकती है. इसीलिए निष्पक्ष जांच के लिए और जटिलताओं को सुलझाने के लिए ऐसे वरिष्ठ पूर्व न्यायिक अधिकारी को जांच का जिम्मा दिया गया है.
गौरतलब है कि सरकार ने अंतरिम डायरेक्टर की भी नियुक्ति की थी जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है जो कि सरकारी सूत्रों के मुताबिक बिलकुल सही फैसला है. कुल मिलाकर अदालत के फैसले पर सरकार का रुख ये है कि बेहतर माहौल बनाने के लिए सरकार ने फैसला लिया था जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है.
अदालत के फैसले के बाद विपक्ष का हमलावर रुख जारी रहा, न केवल सड़कों पर प्रदर्शन किए गए बल्कि सरकार पर सीबीआई की विश्वसनीयता खत्म करने के आरोप भी लगाए गए.ये भी पढ़ें: OPINION: CBI मामले पर प्रदर्शन कर रूठे ‘दोस्तों’ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे राहुल?
इसपर सरकार का कहना है कि बेहतर माहौल बनाने के लिए और सारे विरोधाभास खत्म करने के लिए ही सीवीसी जांच शुरू की गई है. सर्वोच्च न्यायालय ने सारे पक्ष को देखा इसीलिए सरकार के मूल आदेश में न कोई बदलाव और न ही कोई छेड़छाड़ की गई. विपक्ष बेवजह ऐसे मुद्दों को तूल दे रहा है. सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली, केन्द्रीय मंत्री पीपी चौधरी और विजय गोयल ने इसपर सहमति जाहिर की.
एक ओर सरकार अपना रुख साफ करती नजर आ रही है तो दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सड़क पर है, ऐसे में ये बात तय है आनेवाले दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ी तकरार का दौर देखने को मिलेगा.
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