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समान कार्य के लिए समान वेतन और स्थायी करने की मांग को लेकर डीटीसी कर्मचारी 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. डीटीसी में करीब 12 हजार अनुबंधित कर्मचारी काम कर रहे हैं. इसमें से करीब 10 हजार कर्मचारियों के लगातार ड्यूटी पर नहीं आने से सड़कों पर 65 से 70 फीसदी बसें ही उतर पा रही हैं. डीटीसी के बेड़े में 3882 बसें हैं. डीटीसी कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक हड़ताल जारी रखेंगे.‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से गुजरात जाएगी स्पेशल ट्रेन
डीटीसी अनुबंधित कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष बाल्मिकी झा ने बताया, ‘हम 6 दिन से धरने पर बैठे हैं. जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं हम यहां से नहीं हटेंगे. दिल्ली सरकार हमारी बात सुनने की जगह हम पर एस्मा लगा रही है. यह पूरी तरह गलत है.’
कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष झा ने बताया, ‘दिल्ली पुलिस द्वारा हमें बताया गया है कि हम पर एस्मा लगा दिया गया है. अगर हमने हड़ताल खत्म नहीं की, तो वो हमें जेल में डाल देंगे. मैंने कई बार केजरीवाल सरकार को बातचीत के लिए नोटिस दिया है, लेकिन उन्होंने किसी भी बार हमारा जवाब नहीं दिया.’उन्होंने कहा कि केजरीवाल को मंच पर आना चाहिए था और कहना था कि मैं आपके साथ हूं।सारे कर्मचारी हमारे साथ हैं. हम लोग यहां से पीछे नहीं हटेंगे. हम जेल भरो आंदोलन करने को तैयार हैं.
डीटीसी अनुबंधित कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष बाल्मिकी झा ने बताया, ‘कर्मचारियों की कई समस्याएं हैं. सबसे पहली समस्या तो सैलरी की है. एक साल पहले सरकार ने 648 रुपये बढ़ाई थी. पिछले 2 महीने से हमारी सैलरी में कटौती कर दी गई है. हमें रोजाना 481 रुपये दिए जा रहे हैं. उसमें भी बहुत सारी कंडीशन लगाई गई हैं. हम अगर मॉर्निंग में आते हैं और हमारे यहां 100 बस हैं. कंडक्टर 110 हो जाते हैं, तो जो 10 कंडक्टर बचते हैं उनको बोल दिया जाता है कि आज शाम को ड्यूटी पर आना.’
बाल्मिकी झा का कहना है कि उन्हें सुबह की ड्यूटी नहीं मिलती है. कई बार तो शाम को भी ड्यूटी नहीं मिल पाती. बाद में यह कह दिया जाता है घर जाइए और गैरहाजिरी लगा दी जाती है. अगर हम काम करेंगे तो हमें सैलरी मिलेगी और हम काम नहीं करेंगे तो पैसे नहीं मिलते हैं.
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