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(राखी बोस)सोशल मीडिया उस कहावती चॉकलेट बॉक्स की तरह है, जिसके बारे में फॉरेस्ट गम्प की मां ने कहा था कि आपको पता नहीं कि उससे क्या मिलेगा. कभी वो इंसानियत का आइना बन जाता है, तो कभी नफरत, प्रचार प्रसार और तो और कभी सांप्रदायिकता फैलाता है. केरल बाढ़ इसी का एक हाल का उदाहरण है.
लेकिन, अक्सर ये सोशल मीडिया इंसान के प्रेम और दया का प्रतीक भी बन जाता है. एक बार फिर केरल बाढ़ के दौरान ये मानवता का चेहरा बनकर उभरा.
केरल बाढ़: 700 करोड़ की मदद लेने से इनकार पर भारत को ताना मार रहे दुबई के सुल्तान!100 सालों में पहली बार जब केरल में दो हफ्तों से जारी बाढ़ ने पूरे राज्य को अपने आगोश में ले लिया, तो हज़ारों अन्य लोगों की तरह पत्रकार और लेखक अमित वर्मा ने भी मदद करने की सोची. जो लोग केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता के लिए आगे आए, वर्मा ने उन सभी लोगों के लिए एक रचनात्मक सर्विस लॉन्च करने का मन बनाया.
एक अनोखे और महान पहल के तहत वर्मा ने ट्विटर पर ऐलान किया कि वो उन लोगों की मांग पर तुक्तक (लिमरिक्स) लिखेंगे जो केरल में मुख्यमंत्री सहायता कोष में पांच हज़ार या उससे ज्यादा की सहायता देंगे. तुक्तक या लिमरिक्स दरअसल पांच लाइनों के मज़ेदार और मजाकिया छंद या कविताएं होती हैं जो किसी ख़ास विषय पर लिखी जाती है.
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अगस्त 17 को वर्मा ने अपना ये ऑफर ट्विटर पर पोस्ट किया और लोगों से निवेदन किया कि वो अपने दान के प्राप्तियों को अपने पसंद के शीर्षक के साथ भेजें. ये पहल 23 अगस्त तक चली और आखिर तक उन्होंने 104 तुक्तक (लिमरिक्स) लिख लिए और 10 लाख से ज्यादा सहायता राशि भी जुटा लिए.
What’s function in Kerala is heartbreaking. we wish we could do more. So here’s my offer for you:
If we present 5k to a CM’s service fund, I’ll write a limerick on a theme of your choice.https://t.co/ggkX6qXLGwSend me receipt subject. we will post limerick on this thread.
— Amit Varma (@amitvarma) August 18, 2018
अमित वर्मा ने लिखा कि उनके एक दोस्त ने अकेले ही 5 लाख रुपये दान किए, लेकिन इसका प्रचार करने से मना कर दिया. उसने कहा कि मानवता के कार्यों को प्रचार की ज़रूरत नहीं है.
Here are profits for a dual relating donations from my friend, who wishes to stay anonymous. I’ve created 104 limericks so far, and we’ve lifted some-more than 10 lakhs. Give yourself a pat on a back!
My offer has to finish here, sadly. But that should not stop you. 🙂 pic.twitter.com/vCOZDcP9lJ— Amit Varma (@amitvarma) August 24, 2018
केरल को बाढ़ से 19 हज़ार 220 करोड़ का नुकसान हो चुका है. जहां केंद्र सरकार केरल को 600 करोड़ की सहायता दे चुकी है और विदेशी देशों जैसे यूएई से मदद लेने से सरकार इनकार कर चुकी है, ऐसे में केरल को दोबारा बसाने के लिए हर एक व्यक्तिगत दान के मायने बढ़ जाते हैं.
Article source: http://feedproxy.google.com/~r/ndtvkhabar/~3/mG0ur1_ROl0/story01.htm
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