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नई दिल्ली [जेएनएन]। आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। ग्रुप की 40 कंपनियों के निदेशकों का खाता बंद कर दिया गया है और संपत्ति सीज कर दी गई है। फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख अंदाज में कहा कि आम्रपाली हमारे धैर्य की परीक्षा न ले। इसके साथ ही कोर्ट ने शहरी आवास मंत्रालय के सचिव और एनबीसीसी कंपनी के चेयरमैन को गुरुवार को पेश होने का आदेश दिया है।
देश छोड़कर न जाएं
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले आम्रपाली के प्रमोटरों को निर्देश दिया था कि वे देश छोड़कर कहीं न जाएं। साथ ही रियल एस्टेट कंपनी को 2008 से लेकर अब तक के अपने प्रोजेक्ट्स की विस्तृत वित्तीय जानकारी देने को भी कहा था। वहीं कंपनी ने कोर्ट को बताया कि उसने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव दिया है उसके अधूरे और भावी प्रोजेक्ट्स को नेशनल भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) द्वारा पूरा करवाया जाए।

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शहरी विकास मंत्रालय के साथ बैठक
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ के समक्ष आम्रपाली ग्रुप के वकील ने बताया था कि हमने शहरी विकास मंत्रालय के साथ बैठक की है। इसमें एनबीसीसी, नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी भी थे। इसके बाद पीठ ने कंपनी को 10 दिन के भीतर केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव का विस्तृत ब्योरा पेश करने के लिए कहा था।

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परियोजनाओं को लेकर दिया था निर्देश
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने पीठ से आग्रह किया था कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कोर्ट के निर्देश पर बिल्डर ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव नहीं भेजा है बल्कि बिल्डर ने खुद सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखा है। गत 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की 16 परियोजनाओं को अलग-अलग श्रेणी में बांटकर उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया था।
By Amit Mishra
Article source: http://rss.cnn.com/~r/rss/edition_entertainment/~3/_16Pz6H5B9k/the-buzz-today.cnn.html
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