Saturday, 25 August 2018

अहमद पटेल की वापसी बताती है कि डरी हुई है कांग्रेस!


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कांग्रेस में उनकी पहचान एक ट्रबलशूटर की है. कुछ समय तक नेपथ्य में रहने के बाद अहमद पटेल की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम में वापसी बहुत कुछ कह रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी ने 11 राज्य और लोकसभा चुनाव एकसाथ करवाने का जो तीर छोड़ा है वह अभी भी आसमान में तैर रहा है और कांग्रेस उससे डरी हुई है. राजनीतिक तौर पर मजबूत बीजेपी का यह दांव कांग्रेस को भारी पड़ सकता है. 11 करोड़ कार्यकर्ताओं और एक हजार करोड़ से ज्यादा के अधिकृत फंड वाली बीजेपी आज हर लिहाज से कांग्रेस पर भारी दिखाई दे रही है.2019 की जंग के लिए राहुल गांधी ने पुराने सिपाहियों पर जताया भरोसा, बनाई 3 टीम


कांग्रेस को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से कुछ उम्मीद है. इन राज्यों में वह एंटी इनकमबेंसी की तलाश कर अपनी वापसी का रास्ता बना रही है. इन राज्यों में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों को एक तरह से 2019 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. ये चुनाव दिल्ली की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं. पर 11 राज्यों के साथ लोकसभा चुनाव के शगूफेबाजी ने माहौल को गरमा दिया है.


बीजेपी क्या दाव चलेगी इसका भरोसा नहींयूपी चुनाव के ठीक पहले नोटबंदी जैसा झटका दे चुकी मोदी सरकार तीन राज्यों में चुनाव से पहले क्या दाव खेल दे इसका भरोसा कांग्रेस को नहीं है. राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनने के बहुत समय बाद वर्किंग कमेटी का गठन किया. लेकिन संगठन में दूसरा बड़ा बदलाव करने में उन्होंने अधिक देर नहीं की.


सहमति बनाने में मास्टर
राजनीतिक तौर पर भी देखें तो पटेल का यूपीए सरकार के दौरान गठबंधन के साझेदारों से बेहतरीन तालमेल था. और आज भी उनके व्यक्तिगत संबंध कई राज्यों के नेताओं के साथ बने हुए हैं. आपसी सहमति और तालमेल कैसे बैठाया जाए इसके वे मास्टर बताए जाते हैं. राहुल गांधी को कई सहयोगी दल पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर रहे हैं. ऐसे में पटेल का होना मायने रखता है.


एक साथ चुनाव के खिलाफ है आयोग
तकनीकी तौर पर देखें तो भाजपा को अगर 11 राज्यों के साथ लोकसभा के चुनाव करवाने पड़े तो बहुत कुछ बदलाव करने होंगे. कानून में बदलाव सबसे ज्यादा जरूरी है. इसके बाद चुनाव आयोग को तैयार करना. मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत एकसाथ चुनाव कराने के खिलाफ हैं. क्योंकि बहुत सी तैयारियां हैं जो इतनी जल्दी नहीं हो सकती हैं. वीवीपैट मशीनें कम हैं. इधर 2018 के चुनाव को रद्द करने के लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति शासन लगाना होगा. ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा आदि राज्यों के चुनाव पहले करवाने होंगे.


प्रशासनिक तौर पर चल रही हलचल बताती है कि बीजेपी की योजना लोकसभा चुनाव का शेड्यूल मई की बजाय फरवरी करने की है. बीजेपी गर्मियों में चुनाव टालना चाहती है. बीजेपी को लगता है कि उसका वोटबैंक शहरी है और गर्मियों में उसका वोटर घर से बाहर नहीं निकलता.


एमपी में बीजेपी को दोनों चुनाव की तैयारी के निर्देश
हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के साथ हुई राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई है कि तैयारियां दोनों चुनाव के मद्देनजर करना है. इसका मतलब यह कि तीर अभी भी हवा में लटक रहा है.


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