
READ MORE
ये प्रेम कहानी उस नामी वैज्ञानिक की है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान का जनक कहा जाता है. इसी शख्स ने उस इसरो की नींव रखी थी, जो आज दुनिया के पांच बड़े स्पेस ऑर्गनाइजेशन में एक है. उनकी जिंदगी एक प्रेम त्रिकोण में घूमने लगी और एक-दो साल नहीं, करीब बीस सालों तक यूं ही चलती रही. उनकी शादी अगर तूफानी प्रेम कहानी का परिणाम थी, तो दूसरी प्रेम कहानी परिपक्व उम्र में उपजे प्रेम की.ये वैज्ञानिक विक्रम साराभाई हैं. खूबसूरत और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी. लंबे, गोरे और ऊर्जा के साथ बुद्धिमत्ता से भरपूर. शायद ही कोई ऐसा हो, जो दो मिनट भी उनसे मिल ले और उनका कायल न हो जाए. विक्रम उस साराभाई परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो देश के दस शीर्ष उद्योग घरानों में एक था. जिन्होंने देश में औद्योगिक क्रांति की नींव रखने में खास भूमिका अदा की थी. वो खानदान जिसके मधुर रिश्ते गांधी और नेहरू के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से थे.
विक्रम ऑक्सफोर्ड पढ़ने गए थे. भौतिकी और गणित में वह जीनियस थे. ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई के दौरान ही उनकी दिलचस्पी स्पेस साइंस में पढ़ी. ये वही दौर था, जब अमेरिका और रूस स्पेस को लेकर तमाम प्रयोग कर रहे थे. पूरी दुनिया बड़ी दिलचस्पी से इन प्रयोगों की ओर देख रही थी. जब विक्रम वतन वापस लौटे तो ये सपना लेकर कि देश में जाकर वो स्पेस साइंस में कुछ करेंगे. वो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिले. कुछ ही दिनों बाद इसरो की शुरुआत हुई.
किशोर मृणालिनी से पहली मुलाकातअब हम विक्रम साराभाई के जीवन की प्रेम कहानी की ओर लौटते हैं. तब वो किशोरवय में रहे होंगे. अहमदाबाद से मद्रास (अब चेन्नई) गए थे और वहां से ऊटी जा रहे थे. मद्रास में स्वामिनाथन परिवार के घर में कुछ देर के लिए रुके. सुब्बारामा स्वामिनाथन मद्रास के जाने माने बैरिस्टर थे. उनकी पत्नी फ्रीडम फाइटर थे. इस परिवार की एक बेटी लक्ष्मी सहगल इंडियन नेशनल आर्मी में महिला विंग की प्रभारी बनी थी और आजादी के सशस्तर संघर्ष में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के कंधे से कंधा मिला रही थी. यहीं वो पहली बार मृणालिनी से मिले. जो उनसे एक साल बड़ी थीं. आकर्षक और हिरनी जैसी खूबसूरत आंखों वाली. जब इसी मुलाकात में उन्होंने मृणालिनी से साथ में फोटो खिंचवाने का ऑफऱ दिया तो ये कुछ अजीब था. मृणालिनी की रुचि नृत्य में थी. वो कुछ दिनों बाद इसकी ट्रेनिंग के लिए स्विट्जरलैंड के डेलफ्रोज स्कूल भी गईं. उस मुलाकात की बात तो आई गई हो गई. 40 के दशक में दोनों फिर मिले… इस बार दोनों ने एक दूसरे को तरीके से नोटिस किया.

विक्रम साराभाई और उनकी पत्नी मृणालिनी की फाइल फोटो (साभार- दीमोटीवर)
विक्रम को देखकर वो सुधबुध खो बैठीं
1941 में मृणालिनी ऊटी में थीं. विक्रम भी वहां छुट्टियां मनाने गए हुए थे. जब उन्होंने वहां विक्रम को टेनिस खेलते हुए देखा, वो उनपर मोहित हो गईं. उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘मृणालिनी साराभाईः द वॉयस ऑफ द हार्ट’ में लिखा, जैसे कोई ओजस्वी राजपूत अचानक टेनिस कोर्ट में उतर आया हो.
लेकिन प्यार में तो वो पड़ ही चुके थे. मृणालिनी भरतनाट्यम डांसर के रूप में पहचान बनाने लगी थीं. शांति निकेतन में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के बाद उन्होंने बेंगलुरु से डांस की खास तालिम ली थी. फिर खुद नृत्य में अपने तरह से नए प्रयोग कर रही थीं. विक्रम अक्सर उनके क्लासिकल डांस के दर्शक होते थे. हर शो के बाद उनके ओर और खींचते चले जाते थे. आखिरकार दोनों को लग गया कि वो एक दूसरे के बगैर नहीं रह पाएंगे. 1942 में उन्होंने शादी कर ली.
देश की डांसिंग आयकन
खुशवंत सिंह ने अपने कॉलम में मृणालिनी के बारे में लिखा, वो अक्सर अपने ग्रुप दर्पण के साथ लंदन में क्लासिकल डांस के शो करने आती थीं. तब भारतीय उच्चायोग उनका शानदार स्वागत करता था. उनके शो में हालांकि ज्यादा भीड़ तो नहीं होती थी, लेकिन इंग्लिश मीडिया उसकी बहुत तारीफ करता था. उन्हें उन दिनों ब्रिटेन और यूरोप में भारत की डांसिंग आयकन कहा जाता था.

विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान का जनक कहा जाता है (फाइल फोटो)
शादी के बाद मृणालिनी के दो बच्चे हुए. बेटा कार्तिकेय और बेटी मल्लिका. मां बनने के बाद भी उनका डांस जारी रहा. वो लंबे विदेशी दौरों पर जाती रहीं. शादी के कुछ सालों बाद अचानक मृणालिनी को मालूम हुआ कि शांति निकेतन की उसकी फ्रेंड कमला चौधरी विधवा हो गई है. वो कमला से मिलीं. उससे कहा कि वो अहमदाबाद आए, वहां उसका मन बहल जाएगा.
मृणालिनी की दोस्त थीं कमला
कमला का परिवार हरियाणा से ताल्लुक रखने वाला ऐसा परिवार था, जिसके कई सदस्य ब्रिटिश राज में प्रशासकीय सेवाओं में थे. खुद कमला की शादी एक आईसीएस अफसर से हुई थी. वो लाहौर में तैनात थे. शहर के सबसे बड़े अफसर थे. अचानक दीवाली की रात जब शहर आतिशबाजियों के शोर में खोया हुआ था, तब किसी ने नाहक ही पिस्तौल से उनकी हत्या कर दी.
कमला खासी खूबसूरत और आकर्षक महिला थीं. खुशवंत सिंह लिखते हैं, उनकी एक मुस्कुराहट ही किसी का दिल जीतने के लिए काफी होती थी. हालांकि उनके चेहरे पर पति के निधन के बाद एक उदासी रहने लगी थी.
जब कमला अहमदाबाद आईं तो साराभाई परिवार के साथ ही रुकीं. मृणालिनी ने उन पर जोर डाला कि वो साराभाई शिक्षा संस्थानों से जुड़ जाएं. उन्हीं दिनों विक्रम देश का पहला टैक्सटाइल रिसर्च इंस्टीट्यूट खोलने में बिजी थे.

विक्रम साराभाई ने इसरो की नींव रखी थी
इंटरव्यू लेने वाला खुद ही सम्मोहित हो गया
मृणालिनी के कहने पर उन्होंने कमला का इंटरव्यू लिया. ये ऐसा इंटरव्यू था, जिसमें वो कमला से प्रभावित होते चले गए. कमला को तुरंत टैक्सटाइल रिसर्च इंस्टीट्यूट में महत्वपूर्ण पोजिशन दे दी गई. वो अलग बड़े से घर में रहने लगीं.
विक्रम की मुलाकात कमला से तकरीबन इंस्टीट्यूट में रोजाना ही होती थी. मृणालिनी डांस ग्रुप के साथ लंबे विदेशी दौरों पर होती थीं. ये हालात कमला और विक्रम को करीब ले आई. कमला उनकी संगिनी बन गईं. 20 सालों तक जब तक विक्रम की मौत नहीं हो गई, तब तक ये रिश्ता कायम रहा. जाने माने लेखक और मनोविश्लेषक सुधीर कक्कड़ की वो आंटी थीं.
आईआईएम और कमला चौधरी
वर्ष 2011 में आई अपनी किताब ‘ए बुक ऑफ मेमोरी’ में सुधीर ने इस रिश्ते पर विस्तार से लिखा है. उन्होंने लिखा विक्रम, मृणालिनी और कमला के बीच रिश्तों का त्रिकोण काफी असहज हो रहा था. मृणालिनी को लगता था कि उन्हें धोखा मिला है, कमला को लगता था कि उनकी वजह से रिश्तों में तनाव आ रहा है.
ऐसे में उन्होंने अहमदाबाद छोड़कर दिल्ली आने का फैसला कर लिया. विक्रम ने उन्हें रोकने की तमाम कोशिश की. इसी में एक कोशिश अहमदाबाद में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट को लेकर आने की थी. इसके लिए विक्रम साराभाई ने नेहरू के जरिए जमकर लॉबिंग की. आखिरकार वो देश के दूसरे आईआईएम को अहमदाबाद ले आए. कमला चौधरी को रिसर्च डायरेक्टर बनाया गया. इस तरह वो अहमदाबाद में रुक गईं.
कक्कड़ की इसी किताब में लिखा गया है कि तब आईआईएम से संबंधित कोई भी फैसला विक्रम बगैर कमला की सलाह के नहीं लेते थे. आईआईएम अहमदाबाद पर प्रकाशित एक पुस्तक में जहां उसके सही विकास के लिए कमला चौधरी के योगदान को सराहा गया.
वहीं विक्रम साराभाई की बेटी मल्लिका इससे उलट सोचती हैं. उन्होंने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में कहा, हां, पापा के इंटीमेंट रिलेशनशिप लंबे समय तक कमला से थी, लेकिन वो कमला को आईआईएम में रखने को सही नहीं मानतीं, इससे पापा इस इंस्टीट्यूट को जैसा बनाना चाहते थे, वो वैसा नहीं बन पाया.
ये रिश्ते प्लूटोनिक लव से ज्यादा थे
बहरहाल कमला ने बाद में माना कि उनके विक्रम के रिश्ते केवल प्लूटोनिक लव नहीं बल्कि इससे कहीं ज्यादा थे. जब 30 दिसंबर 1970 को केरल के कोवालम में विक्रम साराभाई की संदिग्ध मृत्यु हुई तो कमला अहमदाबाद छोड़कर दिल्ली चली आईं. वो बाद में बरसों में कई विदेशी विश्वविद्यालयों में विजिटिंग फैकल्टी बन गईं. फोर्ड फाउंडेशन का भारत का कामकाज देखने लगीं. साथ ही दिल्ली के दिल्ली पब्लिक स्कूल की गर्वनिंग बॉडी में भी रहीं.
मृणालिनी ने बाद में पति को कैसे याद किया
कमला जब तक जिंदा रहीं, तब तक दिल्ली में हर साल विक्रम साराभाई मेमोरियल लेक्चर कराती रहीं. वर्ष 2006 में उनका निधन हो गया. हालांकि कमला से रिश्तों के बावजूद मृणालिनी ने ना तो विक्रम को छोड़ा और ना उनके पति ने ऐसा करने की कोशिश की. अलबत्ता परिवार पर इसका साया जरूर पड़ा. मृणालिनी ने जब अपनी आत्मकथा लिखी तो उसमें पति को लेकर तमाम आत्मीय और भावुक संस्मरण उसमें डाले और उन्हें एक बेहतर, ऊर्जा से भरपूर जीनियस शख्स के तौर पर याद किया, जिसने एक साथ कई काम किए-परिवार का बिजनेस भी आगे बढ़ाया, कई तरह शिक्षण संस्थानों और संस्थाओं के साथ इसरो की स्थापना की. उन्होंने अपनी इस किताब में लिखा, मैं आज भी विक्रम से प्यार करती हूं.
Article source: http://hindi.news18.com/news/desh/long-que-outside-banks-and-atms-527113.html
No comments:
Post a Comment