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हृदयेश जोशी
सुप्रीम कोर्ट में चारधाम हाईवे मामले से जुड़ी याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी. याचिका में चारधाम हाईवे केस की एनजीटी के मामले की नई सुनवाई के फैसले चुनौती दी गई है. इन सबके बीच पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट्स ने चारधाम यात्रा मार्ग प्रोजेक्ट पर हो रहे काम के चलते ‘बड़े पैमाने पर पर्यावरण से संबंधित नुकसान’ पर चिंता जताई है.देहरादून में हिमालयों में पर्यावरण के मुद्दों पर काम करने वाले सौम्य प्रसाद ने कहा, ‘यात्रा मार्ग को चौड़ा करने के प्रोजेक्ट की शुरुआत होने से पहले पहाड़ों पर मानसून के दौरान कभी ऐसे भूस्खलन नहीं देखे. हजारों पेड़ काट डाले गए और पहाड़ों को काटने और हाईवे बनाने के दौरान मलबों को जमा करने के लिए किसी नियम का पालन नहीं किया गया.’
चारधाम प्रोजेक्ट के खिलाफ होने वाली सुनवाई को जस्टिस जवाद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने 31 मई को पूरा कर लिया. जस्टिस जवाद रहीम उस वक्त ट्रिब्यूनल के कार्यवाहक अध्यक्ष थे. फैसला अभी रुका हुआ था, लेकिन 9 जून को ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने वाले जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने निर्णय लिया कि मामले की नई सुनवाई होगी.यह भी पढ़ें: कोटद्वार में गदेरे में आए उफान से एक महिला की मौत, मकान भी पानी में समाया
याचिकाकर्ताओं के लिए NGT में बहस करने वाले ग्रीन दून के वरिष्ठ वकील संजय पारेख ने कहा, ‘इस मामले में जो निर्णय हो चुका है अब तक उसे सुना दिया जाना चाहिए था लेकिन अब वह पूरे मामले की फिर से सुनवाई कर रहे हैं जो न्यायिक मानदंडों के खिलाफ है. हम इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं.’ पारेख ने कहा, ‘निर्णय में हो रही देरी से आखिरकार स्थानीय जनता को ही दिक्कत हो रही है.’

केंद्र और राज्य सरकार दोनों इस परियोजना को एक अत्याधुनिक राजमार्ग के रूप में बता रहे हैं, जो ‘हर मौसम’ में दो लेन का राजमार्ग होगा. इस परियोजना को लेकर पर्यावरण मानदंडों और कानूनों के पालन के लिए प्रश्न उठाए गए हैं. एनजीटी याचिकाकर्ताओं की सुनवाई के दौरान डंपिंग नियमों के पालन के दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य प्रदान किए गए. इसके भी साक्ष्य दिए गए हैं कि वन विभाग से हजारों पेड़ों को काटने के लिए कोई आदेश नहीं लिया गया था.
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ऐसे समय जब चारधाम राजमार्ग परियोजना पर अत्यधिक संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों और मानदंडों के अनुपालन के मामले में सवालिया निशानों के घेरे में है उसी वक्त तो एक विशेषज्ञ रिपोर्ट ने भी चेतावनी दी है. यूके के शेफील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें कहा गया है कि भारत, मानव गतिविधियों के कारण घातक भूस्खलन के सबसे प्रभावित देशों में से एक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि, एशिया में 20% सबसे घातक भूस्खलन मानव गतिविधियों के चलते हो रहे हैं.
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Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/giriraj-singh-mamata-banerjee-and-other-politicians-gave-their-reaction-on-results-1290894.html
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