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‘राजू और गुड्डी कहां हैं?’… ‘स्कूल गए हैं, पता तो है कि 1 बजे तक आते हैं’… ‘ओह सिर्फ आधा घंटा बचा है, चलो अब देर मत करो’… इतना कहने के बाद राजेश ने सरोज को बिस्तर पर पटक दिया और उसके साथ ज़बरदस्ती हमबिस्तर होने लगा. सरोज मना करती रही क्योंकि घर के सारे काम पड़े थे और दोपहर में स्कूल से लौटकर आ रहे बच्चों के लिए उसे खाना पकाना था. राजेश एक नहीं माना और मारपीट कर उसने एक बार फिर अपनी मर्ज़ी की कर ली.LoveSexaurDhokha: एक नहीं, दो नहीं तो उस लड़की के कितने अफेयर थे?
इसके बाद, राजेश अपने काम पर लौट गया. सरोज अपने कपड़े ठीक कर ही रही थी कि उसके दोनों छोटे छोटे बच्चे घर में दाखिल हो गए. सरोज फौरन रसोई में गई और बच्चों के लिए फटाफट खाने का कुछ इंतज़ाम किया. बच्चों को खाना खिलाकर उसने सुला दिया और खुद भी बिस्तर पर आराम करने लेटी लेकिन बेचैनी उसे खाए जा रही थी. कुछ दिनों से उसे राजेश के साथ ठीक नहीं लग रहा था. सरोज को अपनी पूरी कहानी याद आ रही थी.
करीब 10 साल पहले सरोज की शादी बनारस के रहने वाले कुमार से हुई थी. कुमार एक नौकरीपेशा आदमी था और अपनी नई नवेली बीवी का पूरा ध्यान रखता था. उसका हर नखरा उठाता था और दोनों के बीच एक अच्छा रिश्ता था. फिर अगले तीन सालों में सरोज और कुमार के एक बेटा और एक बेटी हुई. दोनों की परवरिश ठीक चलती रही और इसी दौरान कुमार और सरोज की शादी दो ज़िंदादिल लोगों के उमंग भरे रिश्ते से एक साधारण रिश्ते में बदलने लगी.घर के काम, बच्चों की देखभाल, आॅफिस से लौटने पर पति का खयाल और घर के बुज़ुर्गों की दवा दारू… सरोज की ज़िंदगी इसी तरह गोल गोल घूम रही थी. न कोई उमंग बची थी और न नयेपन का कोई एहसास. शादी के 6 साल हो चुके थे और तभी सरोज के पड़ोस में एक बिज़नेसमैन राजेश रहने आया था. चमचमाती हुई कार, हाथ में कीमती घड़ी और मोबाइल और अकेले आदमी के लिए बड़ा सा घर, यह राजेश की शान थी.
घर की छत पर कुछ काम करते हुए अक्सर सामने वाले घर में रहने वाले राजेश के साथ सरोज की नज़रें मिलतीं. दो बच्चों की मां होने के बावजूद सरोज का आकर्षण कम नहीं हुआ था. कुछ ही दिनों में आलम यह हो गया था कि सरोज बहाने से छत पर जाती या दरवाज़े पर होती जब राजेश के आने जाने का वक्त होता. इधर, घर में आते और रहते हुए राजेश भी पूरी कोशिश करता कि उसे सरोज दिख जाए.

एक दिन मौका मिला तो दोनों ने पहली बार बातचीत की. पड़ोसियों की बदौलत दोनों को एक दूसरे का नाम तो पता चल ही चुका था. पहली बातचीत के बाद दोनों को एक दूसरे से मिलकर अच्छा लगा और खासकर उस रात सरोज सो नहीं पाई क्योंकि उसे वही लमहा याद आता रहा जब राजेश ने बाय कहने के लिए स्टाइल के साथ उससे हाथ मिलाया था. वह राजेश की छुअन अपने हाथ पर पूरी रात महसूस करती रही.
इसके बाद वही हुआ जो होना था. राजेश और सरोज धीरे धीरे एक दूसरे के करीब आते चले गए और बात बहुत आगे पहुंच गई. कुमार को शक होने लगा कि सरोज उसे धोखा दे रही है. मोहल्ले में तरह तरह की बातें होने लगीं और कुमार व सरोज के बीच आए दिन झगड़े होने लगे. सरोज ने अपनी सारी मुश्किलें राजेश को बताईं तो राजेश ने कहा कि अगर वह कुमार को छोड़कर उसके साथ रहने चले तो वह न सिर्फ उससे शादी कर लेगा बल्कि उसके बच्चों को भी अपना लेगा.
फैसला सरोज को करना था. बच्चों का भविष्य दांव पर था. सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता थी. बच्चों के बाप को छोड़कर बच्चों को अपनाने वाले प्रेमी में से एक को चुनने का सवाल था. और आखिरकार, प्यार का पलड़ा शादी से भारी हो गया. सरोज अपने दोनों बच्चों को लेकर कुमार का घर छोड़कर राजेश के पास चली आई. राजेश ने सरोज के साथ रहने के लिए किसी और कॉलोनी में एक मकान लिया और सब वहां रहने लगे.
सरोज ने राजेश से शादी की बात की तो राजेश ने कहा कि इस तरह शादी करना गैरकानूनी होगा. पहले सरोज को कुमार से कानूनन तलाक लेना होगा और उसके बाद ही शादी हो सकेगी. इधर, कुमार और सरोज दोनों तरफ के परिवार सरोज को समझाने की कोशिश कर रहे थे और कुमार के पास लौट आने का दबाव बना रहे थे तभी सबको एक और झटका लगा जब सरोज की तरफ से तलाक का नोटिस कुमार के घर पहुंच गया.
चूंकि कानूनी मामला था इसलिए फैसला जल्दी कहां होने वाला था. इधर, शादी के बगैर सरोज और राजेश साथ रह रहे थे. एक साल बीत चुका था. तलाक नहीं हो सका था और सरोज की दूसरी शादी भी नहीं हो सकी थी. अब राजेश का रंग खुलना शुरू होने वाला था. अब सरोज को महसूस होने लगा कि राजेश को केवल सेक्स में दिलचस्पी रहती है और बाकी बातों को वह टाल जाता है या ध्यान नहीं देता. बच्चों के लिए भी उसे कोई मोह नहीं था.

राजेश के साथ रिश्ते में करीब 3 साल होने तक सरोज की मुश्किलें बढ़ चुकी थीं क्योंकि लगातार शादी की बात तो कर रहा था लेकिन राजेश शादी करने के लिए राज़ी नहीं था. कई बार दोनों के बीच झगड़ा हो चुका था. सेक्स के लिए और सेक्स के दौरान राजेश कई बार सरोज को शारीरिक प्रताड़ना दे चुका था. उसके बच्चों के साथ भी राजेश का बर्ताव पहले रूखा था लेकिन अब तो हिंसक भी हो गया था.
सरोज को लगने लगा था कि 3 साल पहले उसने कुमार को छोड़कर राजेश को चुनने का जो फैसला लिया था, वह गलत था. लेकिन, अब बहुत देर हो चुकी थी. अब तो उसका खुद का परिवार उसका साथ देने के लिए तैयार नहीं था. हर तरफ से सरोज को यही ताने सुनने को मिलते थे कि उसने एक गलत आदमी के झांसे में आकर अपनी ज़िंदगी खुद तबाह कर ली, अब खुद भुगते. सरोज को कोई राह नहीं सूझ रही थी.
अब बात आखिरी मोड़ तक पहुंच चुकी थी. एक दिन सरोज अड़ गई और राजेश से शादी करने की ज़िद पकड़कर बैठ गई. दोनों के बीच पहले भी इस बात को लेकर कहासुनी हो चुकी थी लेकिन इस दिन सरोज नतीजे के मूड में थी. बात बिगड़ती चली गई और राजेश ने सरोज को पहले बुरी तरह पीटा. इतना कि वह ज़ख्मी हो गई. इसके बावजूद सरोज ने ज़िद नहीं छोड़ी तो राजेश ने उसे गालियां देते हुए बच्चों के साथ घर से निकाल दिया.
ये तो सरोज ने सोचा ही नहीं था! अब सरोज क्या करती? कुछ दरवाज़े खटखटाए और मदद मांगी. लेकिन किसी से कितने दिन की मदद मिलती? घर से निकाल दिए जाने के बाद भी सरोज बार बार राजेश के पास गई और गिड़गिड़ाई लेकिन राजेश ने साफ कह दिया कि उसका भी मन सरोज से भर चुका है और अब वह उसके साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता. अब सरोज के पास कोई रास्ता नहीं था. पति को वह छोड़ चुकी थी और अब उसे प्रेमी ने छोड़ दिया था.

अपने पिता के घर भी किस मुंह से जाती लेकिन उसने अपनी हालत तो बता ही दी. कुछ शुभचिंतकों के मशवरे के हिसाब से सरोज ने पुलिस का दरवाज़ा खटखटाया और इंसाफ की मांग की. पहले तो पुलिस ने भी उसकी बात को अनसुना कर दिया. फिर सरोज ने महिला आयोग का दरवाज़े पर गुहार लगाई तो बात एक कदम आगे बढ़ी. पुलिस के आला अफसरों के पास उसका केस पहुंचा. उसने आला अफसरों को अपनी दास्तान सुनाई तो आखिरकार केस दर्ज किया गया.
राजेश के खिलाफ केस तो दर्ज हुआ लेकिन तब तक राजेश बनारस से ही गायब हो चुका था. पुलिस ने अपने हिसाब से कार्यवाही करते हुए उसके ठिकानों पर पूछताछ की लेकिन राजेश का कुछ पता नहीं चला. दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो चुकी सरोज से एक दिन उसके पिता ने मुलाकात की तो उसकी हालत देखकर तरस आ ही गया. वह सरोज को घर लेकर गए और सरोज के इंसाफ पाने की जंग में पिता ने भी आवाज़ उठाई. फिर भी, पिता और परिवार सरोज को पहली की तरह अपना सका, यह कहना मुश्किल है क्योंकि सरोज हमेशा सबकी नज़रों में गुनाहगार ही रही.
(लव सेक्स और धोखे की इस कहानी में घटनाएं एवं किरदार वास्तविक हैं, बस उनके नाम नहीं)
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