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भारत के प्रधान न्यायाधीश (नामित) रंजन गोगोई ने भारतीय संविधान को सर्वोपरि बताया है. जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘हम ऐसे समय में रह रहे हैं, जिसमें हमें क्या खाना चाहिए, पहनना चाहिए, हमारी निजी जिंदगी की छोटी बातें नहीं रह गई हैं. ये ऐसे मुद्दे हैं जो हमें बांटते हैं, लेकिन संविधान हमें एकजुट रखता है.’फेयरवेल स्पीच में बोले CJI- लोगों का इतिहास नहीं, काम देखकर लेता हूं फैसले
नामित सीजेआई रंजन गोगोई ने ये बातें सोमवार को निवर्तमान सीजेआई दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में कही. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से ये समारोह आयोजित किया गया. जस्टिस गोगोई बुधवार (3 अक्टूबर) को अपना पदभार संभालेंगे.
जस्टिस रंजन गोगोई ने विदाई समारोह में निवर्तमान सीजेआई दीपक मिश्रा के काम की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘जस्टिस दीपक मिश्रा उत्कृष्ठ न्यायाधीश हैं. नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान रहा है.’ जस्टिस गोगोई ने इस संबंध में जस्टिस मिश्रा के हाल के फैसलों का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा कि जस्टिस मिश्रा ने अपने कार्यकाल के दौरान मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग के खिलाफ बोला है.जस्टिस चेलामेश्वर के बाद CJI को सरकार की चिट्ठी, कर्नाटक जज के खिलाफ ठीक से नहीं हुई जांच
संवैधानिक आदर्शों को कायम रखना जरूरी
जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘अगर हम अपने संवैधानिक आदर्शों पर सही मायने में कायम करने में विफल रहे, तो हम एक दूसरे को मारते रहेंगे और नफरत करते रहेंगे.’ उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के सभी जज संविधान के प्रति प्रतिबद्ध हैं और वे हमेशा रहेंगे.
He has inspected leisure of particular to chooseexpress choice.Cases like Shakti Vahini,Shafin JahanNavtej Johar concerned individual’s autocracy to select his choice in form of partner whom multitude doesn’t apporve: CJI-designate R Gogoi during farewell duty to CJI Dipak Misra #Delhi pic.twitter.com/zM4xpQHnls
— ANI (@ANI) October 1, 2018
जल्द निपटाने चाहिए पेंडिंग केस
इसके पहले यूथ बार एसोसिएशन के सेमिनार में जस्टिस गोगोई ने लंबे समय से पेंडिग पड़े मामलों को जल्द निपटाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि उनके पास लंबित पड़े मामलों को निपटाने की योजना है और जल्द ही वह इसका खुलासा कर देंगे. जस्टिस गोगोई ने कहा था, ‘लंबित पड़े मामलों से बदनामी होती है. कई बार आरोपी के आपराधिक मामले की सुनवाई उसके सजा पूरे होने के बाद होती है. वहीं, सिविल मामलों में पार्टियों को न्याय दूसरी और तीसरी पीढ़ी पर मिलता है.’
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असम से ताल्लुक रखते हैं जस्टिस रंजन गोगोई
बता दें कि जस्टिस रंजन गोगोई असम से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ. उन्होंने 1978 में वकालत शुरू की और 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बनाए गए. इसके 9 साल बाद 9 सितंबर 2010 को उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर हुआ.
12 फरवरी 2011 को जस्टिस गोगोई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट में आए. सीजेआई बनने के बाद जस्टिस गोगोई का कार्यकाल एक साल, एक महीने और 14 दिन का होगा. वे 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे. (एजेंसी इनपुट के साथ)
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