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टैंकर के साथ बहकर पीओके पहुंचे जम्मू के रहने वाले सलीम के शव को पीओके के कब्रिस्तान में जगह देने से इंकार कर दिया है. तीन महीने से सलीम का शव नदी के किनारे रेत में दफन है. सलीम के परिवार वालों ने पीएम नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से सलीम के शव को भारत लाने की गुहार लगाई है. परिवार पीएम से मिलने के लिए जम्मू से दिल्ली पहुंच गया है.जम्मू संवाददाता पवन के अनुसार सलीम एक गैस टैंकर पर हेल्परी करता था. जून 2018 में टैंकर द्रास के लिए चला था. टैंकर पर सलीम और ड्राइवर सहित तीन लोग थे. लेकिन द्रास पहुंचने के बाद टैंकर झेलन नदी में गिर गया. नदी में बहकर टैंकर पीओके के एक इलाके में पहुंच गया. जुलाई में पीआके से टैंकर मालिक के पास एक फोन आया. टैंकर पर मालिक का मोबाइल नम्बर लिखा हुआ था.
फोन करने वाले युवक ने बताया कि वह पीओके के बाल्टिस्तान से बोल रहा है. यहां नदी में एक टैंकर बहकर आ गया है. टैंकर में एक युवक का शव है. उस युवक ने शव का फोटो भेज दिया. जिससे पहचान हुई कि शव हेल्पर सलीम का है. ये बात सलीम के घर वालों को बताई गई. परिवार राजौरी में रहता है. बेहद गरीब परिवार है.
युवक के अनुसार शव को स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाने की कोशिश की गई. लेकिन सलीम के भारतीय होने के चलते उसे वहां नहीं दफनाने दिया गया. इसके बाद नदी किनारे रेत में ही सलीम को दफना दिया गया है. दूसरी ओर अब परिवार सलीम के शव को भारत लाने की कोशिशों में लग गया है. परिवार ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है.परिवार की मांग है कि बेटे के शव को भारत लाया जाए. जानकारों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी होती रही हैं. कई लोग बहकर पीओके के इलाके में पहुंच जाते हैं. लेकिन पीओके अपने कानून के हिसाब से सिर्फ 6 महीने के अंदर ही किसी शव को वापस करता है.
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