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केरल के सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएएसएस) ने अपना रुख बदल लिया है. आरएसएस ने बुधवार को केरल सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने ‘भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना’ तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कर दिया. आरएसएस महासचिव भैयाजी जोशी ने कहा कि संघ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता है, लेकिन महिलाओं सहित लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.सुप्रीम कोर्ट फैसले के खिलाफ मंगलवार से जारी कई हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए जोशी ने कहा कि यह ‘परंपरा के बलपूर्वक तोड़ने’ के खिलाफ एक स्पष्ट प्रतिक्रिया थी. उन्होंने आध्यात्मिक और सामाजिक नेताओं से अपील की कि सभी लोग साथ आएं और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ न्यायिक सहित सभी विकल्पों पर विचार करें.
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बता दें कि जोशी का ये बयान उनके 2016 में दिए गए बयान से बिल्कुल उलट है. दो साल पहले उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि हज़ारों साल से चली आ रही परंपरा के नाम पर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकने का कोई तुक नहीं बनता. ‘आरएसएस चाहता है कि पुरुषों की तरह महिलाओं को भी मंदिर में समान रूप से प्रवेश मिले.’आरएसएस के इस स्टैंड का तब संघ और बीजेपी की केरल इकाइयों ने खंडन किया था. उन्होंने खुद को परंपरा के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया था, जिन्हें कि शीर्ष अदालत ने असंवैधानिक करार दिया गया है.
बता दें कि केरल सरकार ने बुधवार को कहा था कि वह जल्द ही आने वाली तीर्थयात्रा के समय इस फैसले को लागू करेगी.
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/manoranjan/shooting-place-in-london-452244.html
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