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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। युवाओं को भारतीय सेना में शामिल करने के लिए कई सालों के प्रचार और सेवा शर्तों में बदलावों के बावजूद सेना को अफसरों की भारी कमी से जूझना पड़ रहा है। क्योंकि, इस समय सेना को बड़े पदों पर लगभग सात हजार योग्य अफसरों की सख्त जरूरत है। इस लिहाज से वायु सेना की स्थिति तो बेहतर हुई है, लेकिन नौसेना में भी अभी तक समस्या बनी हुई है।
मौजूदा स्थिति में सेना की जरूरतों को देखते हुए तय कुल 49,933 अधिकारियों के मुकाबले इस समय सिर्फ 42,635 अधिकारी ही सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह सेना को सात हजार से ज्यादा अधिकारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं भारतीय नौसेना में 1,606 अधिकारियों की कमी है। हालांकि वायु सेना में अधिकारियों और जवानों की ज्यादा कमी नही है। यहां सिर्फ 192 अधिकारी पद ही खाली पड़े है। मगर इसके पास लड़ाकू बेड़ो की भारी कमी है।
माना जा रहा है कि भविष्य की लड़ाइयों में आधुनिकतम हथियारों और तकनीक की भूमिका ज्यादा प्रमुख होगी। इसके बावजूद पारंपरिक तैयारी की जरूरत से कतई इन्कार नही किया जा सकता। भारतीय सेना की क्षमता 12 लाख कर्मियों की है। जबकि चीन की सेना में 23 लाख सैनिक हैं। पाकिस्तान के पास पांच लाख से अधिक सैनिक हैं। सेना को युद्ध की किसी आशंका के लिए तैयारी के साथ ही पाकिस्तान और चीन के साथ लगी नियंत्रण रेखा यानि एलओसी और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानि एलएसी पर चौकसी का काम भी संभालना पड़ रहा है।

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गौरतलब है कि अभी पिछले ही सत्र में ही रक्षा राज्यमंत्री ने सदन को बताया था कि फौज में 21,383 पद खाली पड़े हैं। इनमें 7,680 पोस्ट ऑफिसर लेवल की हैं। नौसेना में 16,348 और वायुसेना में 15,010 सैनिकों की कमी है।
इस स्थिति को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने कई कदम जरुर उठाए हैं। इनके तहत संक्षिप्त सेवा अधिकारियों सहित सभी अफसरों को दो, छह और 13 वर्ष की सेवा के बाद क्रमश: कैप्टन, मेजर और लेफ्टिनेंट कर्नल के पद दिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि पदोन्नति के मामले में और भी कई बदलाव किए गए थे। वेतन संबंधी सुधार कर भी इस सेवा को ज्यादा आकर्षक बनाया गया है। वही संक्षिप्त सेवा के कमीशंड अधिकारियों का कार्यकाल दस से बढ़ा कर 14 साल कर दिया गया था।
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By Manish Negi
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