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पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष और बेहरामपुर के सांसद अधीर रंजन को गुरुवार को तेजी से एक चिट्ठी लिखते देखा गया. वह इसे लोकसभा के सचिवालय को देने के लिए लिख रहे थे. इसे उन्होंने तीन तलाक बिल पर दर्ज कराई गई अपनी आपत्ति को वापस लेने के संदर्भ में लिखा.बता दें कि बेहरामपुर अल्पसंख्यक बाहुल इलाका है. एक सांसद होने के नाते उन्होंने निर्णय लिया था कि वह अपने क्षेत्र की आवाज उठाएंगे. लेकिन, तीन तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख को देखते हुए उन्होंने निर्णय लिया कि वह पार्टी के अनुरूप ही चलेंगे.
तीन तलाक बिल को लोकसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा पेश करने के बाद स्पीकर सु्मित्रा महाजन ने सभी सांसदों को इस पर अपनी राय देने को कहा, जिन्होंने इस बिल की प्रस्तावना पर सवाल खड़ा किया था. कांग्रेस का तीन तलाक पर अपना स्टैंड है. कांग्रेस तीन तलाक को प्रतिबंधित करने वाले कानून को समर्थन दिया. लेकिन रणदीप सुरजेवाला ने कहा, हमारा मानना है कि महिलाओं के संगठन और मुस्लिम संगठनों की राय के अनुसार इस कानून को और पुख्ता बनाने की आवश्यकता है. इस कानून को और मजबूत बनाकर इसे और महिला पक्षधर बनाने की जरूरत है.
तीन तलाक मुद्दे पर शाहबानो प्रकरण को भूला नहीं जा सकता है. इंदौर की रहने वाली मुस्लिम महिला शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने 1978 में तलाक दे दिया था. पांच बच्चों की मां 62 वर्षीय शाहबानो ने गुजारा भत्ता पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और पति के खिलाफ गुजारे भत्ते का केस जीत भी लिया.उस समय देशभर में राजनीतिक बवाल मच गया था. राजीव गांधी सरकार ने एक साल के भीतर मुस्लिम महिला (तलाक में संरक्षण का अधिकार) अधिनियम, (1986) पारित कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया था. इसकी काफी आलोचना हुई थी. ऐसे में कांग्रेस इस बार इस मुद्दे पर काफी सोच-समझकर चल रही है.गुजरात चुनाव में राहुल गांधी ने काफी सावधानी से मंदिरों को दौरा किया. कांग्रेस पार्टी इसे अपनी छवि सुधारने में प्रयोग कर रही है. खासतौर पर तब जब साल 2018 में कर्नाटक और पूर्वोत्तर के राज्यों में चुनाव है. ऐसे में पार्टी चुनाव के लिए अपना एजेंडा स्पष्ट कर रही है.
Article source: http://hindi.pradesh18.com/news/live-news/five-water-sharing-disputes-1483167.html
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