Wednesday, 27 June 2018

जगन्नाथ मंदिर मामला: ओडिशा सरकार ने कहा- राष्ट्रपति भवन से नहीं मिली कोई शिकायत


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ओडिशा सरकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने कहा कि राष्ट्रपति से ‘बदसलूकी’ मामले में उन्हें राष्ट्रपति भवन से कोई शिकायत नहीं मिली है.ओडिशा सरकार और मंदिर प्रशासन ने रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी के इस साल मार्च में मंदिर के दौरे के समय उनसे कथित दुर्व्यवहार के बारे में कोई शिकायत मिलने से इंकार किया.शिकायत मिलने से ओडिशा सरकार और मंदिर प्रशासन के इंकार के एक दिन पहले खबरें आई थीं कि मंदिर प्रशासन को राष्ट्रपति भवन से एक पत्र मिला है जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ सेवादारों ने 18 मार्च को 12वीं सदी के इस मंदिर के दौरे के समय राष्ट्रपति कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद के लिए समस्याएं पैदा की थीं.


मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक पी के महापात्रा ने कहा, ‘हमें राष्ट्रपति कार्यालय से कोई पत्र नहीं मिला. उन्होंने किसी दुर्व्यवहार को लेकर हमसे कोई मौखिक शिकायत भी नहीं की. बहरहल, हम मंदिर आने वाले भक्तों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर चिंतित हैं.’


संपर्क किये जाने पर मुख्य सचिव ए पी पधी ने भी कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति भवन से कोई पत्र नहीं मिला है. उन्होंने कहा, ‘नहीं , हमें राष्ट्रपति भवन से इस विषय पर किसी तरह का कोई पत्र नहीं मिला है.’मंदिर प्रशासन ने मंदिर में सेवादारों के दुर्व्यवहार के भक्तों के आरोपों को खारिज नहीं किया और महापात्रा ने कहा कि संस्था सामान्य रूप से इन मामलों की जांच कर रही है.


कहा जा रहा है कि पुरी के गजपति नरेश दिव्यसिंह देब के नेतृत्व वाली श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन कमेटी ने 20 मार्च की अपनी बैठक में सेवादारों के मंदिर में प्रथम दंपति के साथ कथित दुर्व्यवहार पर चर्चा की थी.


बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में सेवादारों के एक समूह ने कथित रूप से गर्भगृह के करीब राष्ट्रपति का रास्ता रोक लिया और उनकी पत्नी को धक्का दिया. रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति भवन ने इस घटना पर आपत्ति जताते हुए 19 मार्च को पुरी के कलेक्टर अरविंद अग्रवाल को सेवादारों के आचरण के खिलाफ नोट भेजा था, जिसके बाद अगले दिन श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने एक बैठक की थी.


(इनपुट भाषा से)


 


 


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/mother-dairys-campaign-jeetenge-dil-484694.html

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