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((अमन सय्यद))महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण लागू करने के निर्णय में हो रही देरी के मुद्दे पर बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई. हाई कोर्ट ने सरकार से शुक्रवार तक इस मामले में अपनी भूमिका को साफ करने को कहा है.
याचिकाकर्ता विनोद पाटिल ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की ओर से टालमटौल का रवैया अपनाने को लेकर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी. जनवरी 2017 में ये याचिका दायर की गई थी. हाई कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि जनवरी 2017 से इस मामले में अब तक क्या किया गया है?maharastra
कोर्ट ने साथ ही सवाल उठाए कि मराठा आरक्षण को लेकर जिस आयोग की स्थापना की गई थी, उसका कामकाज कहां तक पहुंचा है? इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने किया.आपको बता दें कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर “मराठा क्रांती मोर्चा” की ओर से समूचे राज्य भर में करीब 58 मूक यानि शांति मोर्चे निकाले गए थे. इस मुद्दे को लेकर खूब राजनीती भी हो रही है. राज्य में मौजूद किसी भी राजनीतिक पार्टी ने इस आरक्षण का विरोध नहीं किया है. राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय बड़े पैमाने पर कृषि कार्य में संलग्न है और वे ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के तहत शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे हैं.
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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/mother-dairys-campaign-jeetenge-dil-484694.html
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