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पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला इस्लामिक त्योहार ईद-ए-मिलाद-उन-नबी एक दिसंबर से शुरू होकर दो दिसंबर तक मनाया जाएगा.पैगंबर हजरत मोहम्मद आखिरी संदेशवाहक और सबसे महान नबी माने जाते हैं, जिन को खुद अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रईल द्वारा कुरान का सन्देश दिया था. मुस्लिम इनके लिए हमेशा परम आदर भाव रखते हैं.
मुसलमानों के लिए बड़ा त्योहार माने जाने वाले इस दिन को लेकर मुस्लिम समाज में अलग-अलग मत है. शिया और सुन्नी इस दिन को लेकर अपने अपने मत रखते हैं लेकिन मनाने वाले इस दिन को बड़े धूम-धाम से मनाते है.
इस दिन रात भर प्रार्थनाए चलती हैं. पैगंबर मोहम्मद के प्रतीकात्मक पैरों के निशान पर प्रार्थना की जाती है. इस दिन बड़े-बड़े जुलूस भी निकाले जाते हैं. इस दिन पैगंबर मोहम्मद हजरत साहब को पढ़ा जाता है और उन्हे याद किया जाता है.इस्लाम का सबसे पवित्र ग्रंथ कुरान भी इस दिन पढ़ा जाता है. इसके अलावा लोग मक्का मदीना और दरगाहों पर जाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन को नियम से निभाने से लोग अल्लाह के और करीब जाते हैं और उनपर अल्लाह की रहम होती है.
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