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दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज कहा कि किसी के पास भी खाली जमीन और खासकर सरकारी भूखंड के कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल का अधिकार नहीं है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने एक जनहित याचिका पर यह व्यवस्था दी.इसमें सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के एक आदेश को चुनौती दी गयी है, जिसमें पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में एक सरकारी भूखंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाये गए हैं. मजिस्ट्रेट ने उत्तम नगर के एक एनजीओ को नोटिस जारी कर उससे सवाल किया है कि उसने सरकारी भूखंड पर कब्जा कैसे कर लिया और उसका इस्तेमाल कब्रिस्तान के रूप में कैसे कर रहा है.
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता एनजीओ कब्रिस्तान इंतजामिया एसोसिएशन ने एक विधायक के बयान पर सरकारी भूमि का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और ‘उस भूमि से संबंधित कानूनी अधिकार के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है.’ पीठ ने कहा कि सभी विषयों पर विचार के बाद वह इस नतीजे पर पहुंची है कि सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, द्वारका के एक अगस्त, 2017 के फैसले में ‘कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है.’
मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले के खिलाफ दायर एनजीओ की याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, ‘किसी भी व्यक्ति को खाली जमीन और खासकर सरकारी भूखंड के कब्रिस्तान के रूप में अंधाधुंध इस्तेमाल का कोई अधिकार नहीं है.’
Article source: http://hindi.news18.com/news/entertainment/bollywood/pakistani-tv-show-baaghis-trailer-out-it-is-said-to-be-based-on-qandeel-balochs-life-1051575.html
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