Saturday, 2 June 2018

पत्थलगड़ी को लेकर समाज में बन गई है भ्रम की स्थिति


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झारखंड में आदिवासी समाज के बीच कुछ क्षेत्रों में पत्थलगड़ी का मामला लगातार चलता आ रहा है. प्रशासन के लिए यह चुनौती ही नहीं बल्कि टेंशन का विषय है. पत्थलगड़ी सामाजिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण कर्मकांड रहा है.झारखंड के कुछ क्षेत्रों में पत्थलगड़ी से जुड़े समाचार लगातार आ रहे हैं. पत्थलगड़ी खूंटी में सबसे पहले हुआ है और आज भी हो रहा है. इसके अलावा सरायकेला जैसी जगहों से पत्थलगड़ी किए जाने की बात सामने आई है. पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की एक पुरानी परंपरा है. मुख्य रूप से इसका संबंध अपने क्षेत्र के सीमांकन से है. इसके अलावा अपनी परंपरा के नियम कानून का उल्लेख जिसे संविधान के नाम से ये पत्थरों पर अंकित करते हैं. पत्थर पर उकेर कर इसे सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित किया जाता है. ऐसे उदाहरण हैं कि उस क्षेत्र में किसी को प्रवेश करने नहीं दिया जाता है. जानकार मानते हैं कि यह परंपरा है. मगर आज जो पत्थलगड़ी हो रही है उससे लोग इत्तेफाक नहीं रखते हैं.


प्रशासन की नाक के नीचे कई स्थानों पर पत्थलगड़ी होती रही है. इसके लिए अधिकारियों और सुरक्षाबलों को बंधक बना लिया गया है. प्रशासन कभी-कभी लाचार दिखता है. आदिवासी समाज के भोले-भाले लोगों को इसमें बदनाम भी किया जाता है जबकि परंपरा के नाम इनसे कथित रूप से सरकार थोड़ी डरी रहती है. पत्थलगड़ी जैसे विषय पर मुख्यमंत्री रघुवर दास का तेवर बड़ा तल्ख है. पिछले दिनों खूंटी में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने साफ चेतावनी दी थी.


इस परंपरा के निर्वाह को लेकर समाज में थोड़ी भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कई क्षेत्रों में इसका अनुसरण किया जा रहा है. सरकार का सख्त निर्देश है कि पत्थलगड़ी की आड़ में कोई अव्यवस्था नहीं फैले.


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