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केंद्रीय सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अनुकूल फैसला नहीं आया तो संसद और अध्यादेश का विकल्प खुला हुआ है. मंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी विधेयक को पारित करा लिया जाएगा.अपने मंत्रालय की पिछले चार साल की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करते हुए थावर चंद गहलोत ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार पदोन्नति में आरक्षण की पक्षधर है और आशा है कि इस संदर्भ में भी अदालत का फैसला अपेक्षा के अनुरूप रहेगा.
एससी-एसटी कानून को लेकर शीर्ष अदालत के फैसले के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘हमने इस फैसले के खिलाफ अपील की है. आशा है कि शीर्ष अदालत इस बारे में अनुकूल फैसला देगी. लेकिन अगर फैसला अनुकूल नहीं रहा तो हमारे पास संसद और अध्यादेश का विकल्प खुला हुआ है. सरकार सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमत है.’
गौरतलब है कि मार्च महीने में शीर्ष अदालत ने एक फैसले में एससी-एसटी कानून के तहत दर्ज मामलों में बगैर जांच की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी. इस फैसले के विरोध में दो अप्रैल को दलित संगठनों ने बंद का आह्वान किया था. इस दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा हुई थी जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी.थावर चंद गहलोत ने कहा, ‘हम आशा करते हैं कि संसद के आगामी सत्र में ओबीसी विधेयक को पारित करा लिया जाएगा. ट्रांसजेंडर से जुड़े विधेयक को भी पारित कराए जाने की उम्मीद है.’
संयुक्त सचिव पद के लिए सीधी भर्ती से जुड़े विज्ञापन पर मंत्री ने कहा कि यह नियुक्ति अस्थाई है और स्थाई नियुक्तियों में आरक्षण की व्यवस्था जारी है और जारी रहेगी.
रोहित वेमुला के परिवार की आर्थिक मदद से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, ‘वेमुला के परिवार की तरफ से हमारे पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है.’
मंत्री ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए कानून में संशोधन, छात्रवृत्ति का दायरा बढ़ने और कई दूसरी उपलब्धियों का उल्लेख किया.
उनके साथ विभाग के तीनों राज्य मंत्री- रामदास अठावले, विजय सांपला और कृष्णपाल गुर्जर भी मौजूद थे.
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