Saturday, 2 June 2018

हिंसक ही रही है बंगाल की राजनीति, पहले लेफ्ट vs टीएमसी, अब BJP से जंग


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पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में पिछले चार दिन में दो युवकों की लाशें लटकी मिली हैं. बलरामपुर थाने के अंतर्गत बुधवार को त्रिलोचन महतो और शनिवार सुबह दुलाल कुमार का शाव बरामद किया गया. आरोप है की दोनों बीजेपी समर्थक थे, इसलिए मार दिये गए. बीजेपी के नेताओं ने बंगाल में सत्ता में बैठी पार्टी तृणमूल के समर्थकों पर इनकी हत्या का आरोप लगाया है.त्रिलोचन महतो ओबीसी वर्ग से है जिसका शव पेड़ से लटका मिला था. उसकी टी-शर्ट पर, साथ ही जमीन पर रखे एक पर्चे पर बंगला में ऐसे शब्द लिखे गए थे, जिससे यह माना जा रहा कि बीजेपी समर्थक होना ही हत्या की वजह थी. घरवालों के अनुसार वह घर से निकला, फिर फोन पर बताय कि कुछ लोग उसे बांध कर पीट रहे हैं. भोर में उसकी लाश मिली. शनिवार सुबह दुलाल की लाश एक पावर ग्रिड टॉवर से लटकी मिली. दुलाल भी शुक्रवार रात से लापता था.


दोनों मृतक बीजेपी समर्थक बताए जा रहे हैं. इसके इलावा एक और बीजेपी समर्थक की पुरुलिया के बड़बजार इलाके में पिटाई हुई. चोंट गंभीर होने की वजह से सदर अस्पताल भेजा दिया गया.


भाजपा ने बंगाल से दिल्ली तक इन दो लोगों के मारे जाने के खिलाफ मुहीम छेड़ दी है. प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. वहीं तृणमूल की ओर से कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया गया था. पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता डेरेक-ओ-ब्राएन ने शनिवार की घटना की निंदा करते हुए ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि सारे पहलू छान-बीन के तहत देखे जाएं और इस तरह की घटना के पीछे दोषियों को सज़ा दी जाये. डेरेक ने प्रश्न उठाए हैं की इस घटना में झारखंड की सीमा का क्या रोल है. उनकी ट्वीट में बजरंग दल, माओवादी और बीजेपी से जुड़े तत्वों पर भी सवाल उठाया.भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एएनआई को दिये गए बयान में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाया है की उन्होंने लोगों को उकसाया है.


पंचायत चुनावों में हुई हिंसा के बाद यह बंगाल में हिंसा की बड़ी घटना है. पंचायत चुनाव में मतदान के दिन ही पश्चिम बंगाल में आंकड़ों के अनुसार 14 लोग मारे गए. चुनावों से पहले भी 17 लोगों मारे गए. राजनीति में समर्थक सभी पार्टियों जूझ रहे हैं. लेकिन बंगाल में अब लड़ाई तृणमूल बनाम भाजपा साफ है.


पिछले पंचायत और उपचुनाव में भाजपा दूसरे नंबर पर पहुंक चुकी है. लेफ्ट और कांग्रेस अपने-अपने राजनितिक अस्तित्व की लड़ाई राज्य में लड़ रहे हैं. इसलिए अब जो भी कर्मी मारा जा रहा है उसके लिए पक्षी दल को जिम्मेदार माना जा रहा है. इन दो भाजपा कर्मियों की मौत पर भाजपा आंदोलन कर रही है.


वहीं, तृणमूल अपने संगठन को कमजोर नहीं होने देना चाहती. बंगाल में राजनीति से जुड़ी हिंसा नई नहीं है. सिंगूर, नंदीगरम, लालगढ़ पिछले दशक में देश भर में इसलिए जाने गए क्योंकि वहां तृणमूल कर्मी लेफ्ट के कैडर्स से जूझते रहे. अब पार्टियां बदल गई हैं. तृणमूल सत्ता में और बीजेपी विपक्ष में लेकिन हिंसक राजनीति अपनी जगह बरकरार है.


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