Friday, 1 December 2017

एशिया यात्रा में पहली बार पोप ने किया रोहिंग्या शब्द का प्रयोग


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पोप फ्रांसिस ने म्यांमार के पीड़ित रोहिंग्या समुदाय की दुर्दशा पर दुनिया की उदासीनता को लेकर अफसोस जताया. पोप ने अपनी ऐतिहासिक एशिया यात्रा के दौरान पहली बार सार्वजनिक रूप से उनका जातीय नाम लिया.रोहिंग्या आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमलों के जवाब में म्यांमार की सेना की कार्रवाई से बचने के लिए करीब छह लाख 20 हजार रोहिंग्या मुसलमान भागकर बांग्लादेश आ गए हैं. पोप तीन दिवसीय दौरे पर बांग्लादेश में हैं. उन्होंने रोहिंग्या शरणार्थियों के 16 समूहों से मुलाकात की जिन्हें म्यांमार की सीमा से लगे काक्स बाजार में बने अस्थायी शिविरों से यहां लाया गया था. पोप ने उन्हें आशीर्वाद दिया और बौद्ध बहुल म्यांमार से भाग कर आने की उनकी आपबीती सुनी.


पोप ने ढाका में आर्कबिशप पैलेस में एक रोहिंग्या समूह से कहा कि एशिया में कुछ दशकों के सबसे बड़े शरणार्थी संकट के प्रति दुनिया की उदासीनता के लिए वह उनसे माफी की अपील करते हैं.


यह पहला मौका है जब पोप ने अपनी एशिया यात्रा के दौरान रोहिंग्या शब्द का इस्तेमाल किया. कई मानव अधिकार समूहों ने म्यांमार में रोहिंग्या शब्द का इस्तेमाल नहीं करने को लेकर पोप की आलोचना की है.

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